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मुंबई : देवेंद्र फड़नवीस ने शिवसेना पर साधा निशाना

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सचिन वझे को नौकरी में वापस क्यों लिया गया?

मुंबई : महाराष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस का कहना है कि मुकेश अंबानी के घर के निकट मिली विस्फोटक लदी स्कार्पियो मामले में एपीआइ सचिन वझे की गिरफ्तारी व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का तबादला महत्वपूर्ण नहीं है। ये छोटे लोग हैं। इस मामले की जांच कर रही एनआइए को पता लगाना चाहिए कि सचिन वझे का राजनीतिक आका कौन है? फड़नवीस ने मनसुख हिरेन की हत्या का मामला भी इसी से जुड़ा होने के कारण उस मामले की जांच को भी एनआइए से ही करवाने की मांग की है। इस मामले में शुरू से आक्रामक भूमिका निभाते आ रहे देवेंद्र फड़नवीस ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि सचिन वझे सीधे पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को रिपोर्ट करता था। इसलिए परमबीर तो जिम्मेदार हैं ही, लेकिन मैं जांच एजेंसियों से उम्मीद करता हूं कि सचिन वझे के आपरेटर्स कौन हैं, इसका भी पता जरूर लगाएं। फड़नवीस के अनुसार वे (वझे और उसके साथी) अंबानी के घर के निकट एक विस्फोटक लदी कार खड़ी करके कोई बहुत बड़ा संदेश देना चाहते थे। ये काम अकेले सचिन वझे नहीं कर सकता था। उसके पीछे कोई और भी है। उनका मकसद क्या था, इसका पता एनआइए को लगाना चाहिए। फड़नवीस के अनुसार, यह असफलता सिर्फ पुलिस विभाग की नहीं, बल्कि यह पूरी सरकार की असफलता है।
सीधे शिवसेना पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिन वझे न सिर्फ हाईकोर्ट के आदेश पर सस्पेंड था, और वीआरएस ले चुका था, बल्कि 2017 में उस पर हफ्ता-वसूली का एक आपराधिक मामला भी दर्ज हो चुका था। इस मामले में वह अग्रिम जमानत पर था। उसका यह इतिहास जानते हुए भी शिवसेना ने उसे सीआइयू के प्रमुख जैसी महत्वपूर्ण पोस्टिंग दी। इसके पीछे शिवसेना का क्या उद्देश्य था, इसकी भी जांच होनी चाहिए। फड़नवीस ने बताया कि 2018 में जब वह मुख्यमंत्री थे, तो खुद उद्धव ठाकरे व शिवसेना के कुछ मंत्रियों ने उनसे मिलकर सचिन वझे की बहाली की सिफारिश की थी। लेकिन महाधिवक्ता से राय लेने के बाद उन्होंने सचिन वझे की बहाली की सिफारिश ठुकरा दी थी। क्योंकि उसे उच्च न्यायालय के निर्देश पर निलंबित किया गया था। फिर जब 2019 में शिवसेनानीत महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो कोविड-19 के दौरान पुलिस बल की कमी का हवाला देकर उसे बहाल कर दिया गया। वह भी सीआइयू प्रमुख जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ।