मुंबई : एक समय अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली की आपराधिक गतिविधियों के गढ़ रहे भायकला इलाके के दगडी चॉल का पुनर्विकास किया जाएगा। अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि चॉल को गिराकर उसके स्थान पर 40 मंजिला दो इमारतें खड़ी की जाएंगी। यह चॉल चार मंजिला है और इसमें 10 ढांचे हैं। इनमें 350 से अधिक किराएदार रहते हैं। इसका निर्माण कपड़ा मिल में काम करने वाले कर्मचारियों के रहने के लिए किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि चॉल के मूल किरायेदार, जिन्होंने पूरी जिंदगी 120 वर्गफुट के घर में बिता दिया, उन्हें बहुमंजिला इमारत में 450 वर्ग फुट में बना अपार्टमेंट मिलेगा। उन्होंने बताया कि इमारत के मालिक ने इसके पुनर्विकास का प्रस्ताव भेजा था जिसे महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने मंजूर कर लिया है।
बता दें कि गवली इस चॉल के मालिक हैं जिसे एक समय उनके गढ़ के रूप में जाना जाता था। म्हाडा के मुंबई इमारत मरम्मत और पुनर्विकास बोर्ड के अध्यक्ष विनोद घोषाल्कर ने बताया कि चॉल परिसर में मौजूद ढांचे 100 साल से अधिक पुराने हैं और जर्जर अवस्था में हैं।
विनोद घोषाल्कर ने बताया, ‘मालिक और किरायेदार एक साथ आए और जनवरी में परिसर के पुनर्विकास का प्रस्ताव जमा किया। नियमों के तहत पुनर्विकास योजना में मालिक को प्रथमिकता दी जाती है।’
गौरतलब है कि यह चॉल वर्ष 1970 से ही चर्चा में है जब अरुण गवली और उसके भाई पप्पा गवली ने अपनी आपराधिक गतिविधियां शुरू की। सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त सुरेश वलीशेट्टी ने बताया कि गवली चॉल में ही ‘दरबार’ लगाता था और अकसर वह समझौते कराने की जगह होती थी।





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