मुंबई, मुंबई लोकल में यात्रा करने का सपना देखने वालों के लिए फ़िलहाल बुरी खबर है। महाराष्ट्र के मदद एवं पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कहा है कि जब मुंबई में कोरोना खत्म नहीं होगा तब तक लोकल ट्रेन नहीं चलाई जाएगी।
कोरोना के प्रसार को रोकने और अनलॉक को शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने पांच लेवल बनाये थे, जिनके अनुसार अनलॉक को शुरू किया जाना था। लेवल वन में आने वाले जिलों में लगभग सब कुछ सामान्य करने की बात कही जा रही थी। फिलहाल मुंबई लेवल वन में आ चुका है फिर भी कोरोना को खत्म करने के लिए शहर में लेवल तीन की बंदिशों को जारी रखा गया है।
कोरोना के मामले घटने के साथ ही लोगों की सुविधाओं के लिए कई तरह की छूट दी जा रही हैं। मगर इन छूट का उल्लंघन हो रहा हैं। मुंबई लोकल इसका ताजा उदाहरण बन गई है। मुंबई लोकल में फिलहाल सामान्य लोगों को यात्रा की अनुमति नहीं है। व्यापार और ऑफिस के कामकाज के अलावा बेहद जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को ही इजाजत दी गई है। इस प्रतिबंध के बावजूद मुंबई लोकल में अब करीब 35 लाख यात्री चलने लगे हैं।
खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर यात्री फर्जी पहचान पत्र पर यात्रा कर रहे हैं। ट्रेनों में पीक ऑवर्स की तरह भीड़ दिखाई देने लगी है। ऐसे में चिंता और भी तब बढ़ जाती है जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लापरवाही का यही रवैया रहा तो 6-8 सप्ताह में तीसरी लहर आ सकती है।
जवेरी बाजार, भूलेश्वर, कालबादेवी, क्रॉफर्ड मार्केट, अब्दुल रहमान स्ट्रीट, मस्जिद बंदर इस तरह के व्यापारी क्षेत्रों मुंबई के दूसरे छोर से आने वाले कई हॉकर्स और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले फर्जी पहचान पत्रों पर यात्रा कर रहे हैं। एक हॉकर ने बताया कि मेडिकल, सिक्युरिटी गार्ड इत्यादि के पहचान पत्र ₹300 से ₹500 रूपये में तैयार हो जाते हैं।





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