मुंबई, किसी राज्य की राजनीति करने वाला हर नेता एक दिन अपने सिर पर मुख्यमंत्री का ताज देखना चाहता है। इस बात को कुछ नेता कहते भी हैं और कुछ सही समय का इंतजार करते हैं। फिलहाल महाराष्ट्र में बीजेपी कोटे से राज्यसभा सांसद छत्रपति संभाजी राजे ने भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई है। संभाजी राजे को अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए काफी मेहनत और जोड़तोड़ और सभी समाज को साथ लेकर चलना होगा।
बीड दौरे पर संवाद यात्रा के दौरान छत्रपति संभाजी राजे ने एक युवक के सवाल के जवाब में कहा था कि मुझसे अगर सवाल करना है तो पहले मुझे मुख्यमंत्री बनाओ। आपको नए- पुराने मुख्यमंत्री से सवाल करना चाहिए लेकिन वहां आपको जवाब नहीं मिलेगा। खैर संभाजी राजे की यह महत्वकांक्षा हकीकत के धरातल पर कितनी सफल हो सकती है, यह समझने की कोशिश करते हैं। छत्रपति संभाजी राजे भले ही शिवाजी महाराज के वंशज के रूप में जाने जाते हैं।
महाराष्ट्र में फिलहाल आरक्षण को लेकर सियासत गर्म है। एक तरफ मराठा समाज आरक्षण की मांग कर रहा है तो वहीं ओबीसी समाज सरकार को ललकार रहा है। मराठा समाज को आरक्षण मिले, इसलिए संभाजी राजे संवाद यात्रा निकाल रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान जब छत्रपति संभाजी राजे से एक युवक ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री से सवाल करना चाहिए। ‘मुझसे सवाल करना है तो पहले मुझे सीएम बनाओ’।
मराठा समाज को आरक्षण दिलाने के लिए संभाजी राजे राज्य भर में सक्रिय नजर आ रहे हैं। यह बात भी स्वीकार करनी होगी कि इस मुद्दे पर समाज का भी समर्थन संभाजी राजे को मिल रहा है। महाराष्ट्र में मराठा समाज से अन्य नेता और संगठन भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं लेकिन जो इनका जनसमर्थन छत्रपति को मिल रहा है। वैसा किसी को मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। महाराष्ट्र के बहुसंख्यक समाज में से एक मराठा समुदाय भी है लेकिन क्या एक समुदाय के लोगों को साथ लेकर या उन्हें खुश करके मुख्यमंत्री की गद्दी मिलना संभव है?
महाराष्ट्र में मराठा समाज के अलावा ओबीसी समाज भी आरक्षण की मांग को लेकर मैदान में है। इसके अलावा संभाजी राजे महाराष्ट्र में जहां कहीं भी दौरे पर जाते हैं वह सिर्फ मराठा समाज के ही लोग या नेता नहीं आते बल्कि ओबीसी समाज के नेता और लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे में इन्हें भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है। साथ इसका यह मतलब भी नहीं है कि ओबीसी नेताओं का समर्थन राजे को हासिल है। संभाजी राजे की राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर होने के बाद ओबीसी नेताओं का क्या रूप रहेगा इस पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।





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