मुंबई, कृषि कानून को निरस्त करने की घोषणा इस बात का उदाहरण है कि इस देश में आम आदमी क्या कर सकता है और उसकी ताकत क्या है। ऐसी प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दी। मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पूरे देश के किसानों में इन कानूनों के खिलाफ विरोध का माहौल है। आंदोलन शुरू हुआ और आज भी जारी है। हम सबका पेट भरनेवाले अन्नदाता बेवजह शिकार हो गए हैं लेकिन अन्नदाता ने अपनी ताकत दिखा दी। उनको मेरा बार-बार वंदन। इस आंदोलन में अपनी जान गंवानेवाले वीरों को मैं नम्रतापूर्वक इस मौके पर अभिवादन करता हूं।
बहरहाल, अब यह सरकार पर निर्भर है। इस कानून को वापस लेने की घोषणा प्रधानमंत्री ने कल गुरु नानक जयंती के अवसर पर की। इसका मैं सबसे पहले स्वागत करता हूं, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा। महाविकास आघाड़ी ने बार-बार कहा है कि हम इन कृषि कानूनों के खिलाफ हैं। इसके अलावा वैâबिनेट और विधानमंडल में इन कानूनों के प्रतिकूल प्रभावों पर चर्चा भी की गई है।
केंद्र को इससे आगे ऐसा कोई भी कानून बनाने से पहले सभी विपक्षी दलों और संबंधित संगठनों को विश्वास में लेकर पूरे देश के हित में निर्णय लेना होगा। मतलब, आज जो अपमान हुआ है, वह आगे न हो। इन कानूनों को वापस लेने की तकनीकी प्रक्रिया भी जल्द से जल्द पूरी होगी, ऐसी मुझे अपेक्षा है। ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा।





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