मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि वह 2003 के ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत के मामले में नए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) की नियुक्ति नहीं करेगी। इस मामले में बर्खास्त सिपाही सचिन वाजे सहित चार पुलिसकर्मी शामिल थे। यह सभी 22 मार्च तक ट्रायल का सामना कर रहे हैं। यूनुस की मां आसिया बेगम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने यह बयान न्यायमूर्ति पीबी वराले और न्यायमूर्ति एसपी तावड़े की पीठ के समक्ष दिया। इस याचिका में पिछले एसपीपी धीरज मिराजकर को मामले से हटाने को चुनौती दी गई थी। 2018 में मिराजकर को हटाए जाने के बाद यूनुस की मां आसिया बेगम ने 2018 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कुंभकोनी ने बंबई हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के अधिकारियों ने मिराजकर से बात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य कारणों सहित कई अन्य कारणों का हवाला देते हुए इस मामले में एसपीपी के रूप में काम करने में असमर्थता जाहिर की थी। बेगम के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता मिहूर देसाई ने बंबई हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता भी मिराजकर से बात करना चाहता था और पुष्टि करना चाहता था कि बाद में इस मामले में एसपीपी के रूप में वह काम काम कर पाएंगे या नहीं। सुनवाई के दौरान देसाई ने अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि महाराष्ट्र सरकार तब तक नया एसपीपी नियुक्त न करे। यूनुस की मां आसिया बेगम द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि मिराजकर को सितंबर 2015 में एसपीपी नियुक्त किया गया था, लेकिन अप्रैल 2018 में अचानक उन्हें पद से हटा दिया गया था।





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