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बच्चों को नर्सरी, बालवाड़ी आंगनबाड़ी की बजाय पहली कक्षा में दाखिला दिलाने में रुचि बढ़ी

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मुंबई, राज्य में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ियों और प्री-प्राइमरी स्कूलों के बावजूद अभिभावकों में अपने बच्चों को नर्सरी, बालवाड़ी आंगनबाड़ी की बजाय पहली कक्षा में दाखिला दिलाने में रुचि बढ़ी है। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों की तुलना में पूर्व-प्राथमिक स्तर पर छात्र नामांकन और उपस्थिति बहुत ही कम है। योजना में यह भी कहा गया है कि यह समस्या इसलिए उत्पन्न होती है, क्योंकि पांच साल के बच्चों का सीधे पहली में दाखिला हो जाता है। यह खुलासा राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एमएससीईआरटी) द्वारा घोषित राज्य पाठ्यक्रम योजना में हुआ है।
एकीकृत बाल विकास योजना के अंतर्गत प्रदेश में वर्ष २०२३ में कुल स्वीकृत १,१०,४८६ आंगनबाड़ियों में से १,१०,४४५ आंगनबाड़ियां कार्यरत हैं। फिर भी पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में छात्रों का नामांकन कम है। साल २०१९-२० में महाराष्ट्र में प्री-प्राइमरी स्कूल में उपस्थिति शहरी क्षेत्रों में ५५.९ प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में ६४.३ प्रतिशत दर्ज की गई। २ से ४ वर्ष की आयु के ६०.५ प्रतिशत बच्चे प्री-प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहे हैं। साल २०२१-२२ में पहली कक्षा में १२,३३,४८० बच्चों का दाखिला हुआ। इनमें से सिर्फ ६८.४४ फीसदी यानी करीब ८,४४,१९४ बच्चे प्री-प्राइमरी स्कूल गए। इसी तरह इन बच्चों में से ११.२४ प्रतिशत बच्चे उसी स्कूल के प्री-प्राइमरी कक्षा में पढ़ते रहे, जबकि ५.९० प्रतिशत बच्चे दूसरे स्कूलों में दाखिला लिया था और ५१.३० प्रतिशत बच्चे आंगनबाड़ी में प्री-प्राइमरी में शिक्षा लिए थे।
महाराष्ट्र में चल रहे आंगनबाड़ियों में कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है, जबकि निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों की संगठित जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है। जुलाई २०२३ में आंगनबाड़ियों में स्वीकृत पदों की संख्या १,१०,४८६ है, जिनमें से ४.८६ प्रतिशत पद रिक्त हैं। आंगनवाड़ी सहायिकाओं के स्वीकृत पदों में से १५.८६ प्रतिशत रिक्त हैं।
राज्य में प्रारंभिक बचपन की शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उपलब्ध समय की कमी, शिक्षकों की क्षमता, जगह की कमी के कारण आंगनबाड़ियों में शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से अपेक्षित शैक्षणिक उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते। पहली में जाने के बाद भी यह समस्या बनी रहती है।