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पत्रकार मनोज दुबे की कहानी उनकी ज़ुबानी

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क्यों घाटकोपर पोलीस थाने ने दर्ज किया दुबे पे फ़र्ज़ी मुकदमा?
किस अधिकारी ने दुबे के बेगुनाही के सबूत और सीसीटीवी फुटेज नष्ट किये?

मुंबई:- संवाददाता

घाटकोपर में पत्रकार मनोज दुबे पे फ़र्ज़ी मुकदमा दर्ज करने का मामला सामने आया है दुबे ने बताया कि वो घाटकोपर के स्थानिक निवासी और पेशे से पत्रकार है।घाटकोपर में चल रहे बड़े पैमाने पर ड्रग्स के कारोबार के खिलाफ अपनी जान खतरे में डालकर हमेशा अवैध धंधे वालो के खिलाफ लड़ते आये है ।।दुबे ने बताया कि घाटकोपर के चिराग नगर,आजाद नगर,संजय नगर,हिमालय सोसाइटी,नारायण नगर,गोलीबारी रोड,नित्यानंद नगर,इंदिरा नगर जैसे इलाको में बड़े पैमाने पर ड्रग्स का कारोबार खुलेआम चल रहा था।जिसकी वजह से घाटकोपर में 75 प्रतिशत अपराध बढ़ गए थे।
ड्रग्स के नशे में मानसिक संतुलन खोकर युवापीढ़ी मारपीट,चोरी,हत्या,बलत्कार,चैन स्नेचिंग, मोबाइल चोरी,पोस्को जैसे अपराध को अंजाम दे रहे थे।
स्कूल और कॉलेज के बच्चे भी इस नशे की लत का शिकार हो रहे थे।दुबे ने अपनी आंखों से कई युवा पीढ़ी की ज़िंदगी ड्रग्स की वजह से खराब होते देखी।इस लिए दुबे ने अपनी जान की बाजी लगाकर ऐसे लोगो के खिलाफ मोहिम छेड़ी मुंबई पोलीस के आला अधिकारियों और नारकोटिक्स डिपार्टमेंट में ऐसे ड्रग्स माफियाओं की शिकायत की जिसके बाद कई लोगो पे केस दर्ज किया गया। कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी दुबे द्वारा की गई शिकायत को अवैध धंधे वालों को बता दिया करते थे। कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अवैध धंधे वालों को बोल देते हैं कि हम लोग तो आपको सपोर्ट करते हैं दुबे आप लोगों के धंधे की शिकायत कर रहा है अगर धंधा करना है तो दुबे का कुछ करो।इस तरह दुबे को फसाने के लिए हमेशा कुछ अधिकारी प्रत्यन करते रहते थे।
दुबे ने घाटकोपर में कुछ जगहों पे सीसीटीवी लगाने की मांग मुंबई पोलीस के आला अधिकारियों और विधायक राम कदम से की थी जहाँ चोरी और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती थी।इस बात से कुछ अधिकारियों को बुरी लगी।
कई लोग जो पोलीस में शिकायत दर्ज कराने जाते थे उनकी शिकायत नही लिखी जाती थी और एफआईआर दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को एफआईआर की कॉपी नही दी जाती थी ऐसे लोगो को सहायता करने का काम मनोज दुबे ने हमेशा किया जो भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की आंखों में खटकता था।
घाटकोपर पोलीस थाने में सन 2020 में सेक्सटॉर्शन का केस दर्ज हुआ था जिसमे 2 आरोपियों से पैसे लेकर उनका नाम एफआईआर में दर्ज नही किया गया था इस बात की जानकारी दुबे ने मुंबई पोलीस के आलाधिकारी को की थी।इस मामले की जांच पोलीस निरीक्षक दत्ताराम गिरप के पास थी जिसपे कोई कार्यवाही ना करते हुवे दोषी पोलीस कर्मियों को बचाने का प्रयत्न किया गया।
घाटकोपर में एक पोलीस निरीक्षक ने अपने वर्दी,पद और पावर का गलत इस्तेमाल करते हुवे एक चोर को संरक्षण देने का काम किया है।
सड़क खुदाई के वक़्त एमटीएनएल के बंद पड़े केबल(वायर) के लाखों की चोरी की गई इस बात की शिकायत दुबे ने आपले सरकार द्वारा मुंबई पोलीस को दी थी।इस बात की खबर दुबे ने अखबार में प्रकाशित की थी।जिस बात से उस चोर को सरंक्षण देने वाला पोलीस निरीक्षक दुबे को अपना शत्रु मानने लगा और दुबे को वो खबर सोशल मीडिया से हटाने का संदेश पहुँचाने लगा।
इस केबल चोर ने अपना जन्मदिन का केक तलवार से काटा जिसका वीडियो वायरल होने के बाद घाटकोपर पोलीस ने कोई केस दर्ज नही किया क्योंकि इसे एक पोलीस निरीक्षक का संरक्षण प्राप्त था।
घाटकोपर पोलीस में कार्यरत एक पोलीस उपनिरीक्षक ने शादीशुदा होते हुवे भी एक लड़की से शादी की और उसके साथ आये दिन मारपीट करता था।पीड़ित लड़की ने दुबे को बताया कि उस पोलीस वाले ने इसका जबरन गर्भपात कराया और जब वो दुबारा गर्भवती हुवी और उसने एक लड़की को जन्म दिया तो उस पोलीस वाले ने उसे मोबाइल संदेश द्वारा तीन तलाख दिया।
इस बात की शिकायत उस महिला ने घाटकोपर पोलीस थाने में कई बार की लेकिन उस लड़की की शिकायत दर्ज नही की गई उसे वहां से भगा दिया जाता था।
उस महिला ने निराश होकर दुबे से पत्र द्वारा सहायता मांगी उसकी बात सुनकर दुबे ने उस पोलीस कर्मी को समझाने का प्रयत्न किया पर वो किसी भी बात को सुनने तैयार नही हुवा।
उस लड़की के पास अपनी जन्मी बेटी के दूध के लिए भी पैसे नही थे मैंने उस लड़की की मजबूरी देखते हुवे इस बात की जानकारी परिमंडल सात के पूर्व डीसीपी अखिलेश सिंह और सह पोलीस आयुक्त विनयकुमार चौबे से की जिसके बाद उस लड़की की शिकायत पर घाटकोपर पोलीस थाने ने एफआईआर दर्ज की और वो पोलीस उपनिरीक्षक फरार हो गया।
न्यायालय से जमानत मिलने के बाद वो पोलीस कर्मी अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों से मिलके दुबे से ड्यूटी अधिकारी के सामने मारपीट करके झूठे गवाह खड़े करके खंडनी का केस दर्ज करवाया।
दुबे ने इस मामले में सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की लेकिन पोलीस निरीक्षक दत्ताराम गिरप ने आरटीआई में फुटेज ना देकर दुबे की बेगुनाही के सबूत नष्ट किये।
इस प्रकार घाटकोपर पोलीस थाने के कैच अधिकारियों ने दुबे को फसाया।
घाटकोपर पोलीस थाने में लॉकडाउन में तय समय सीमा से अधिक देर रात हुक्का पार्लर,जुगार,बार,मिलावटी ताड़ी,सड़को पे अवैध स्टाल चल रहे थे।।हुक्के पार्लर में लोगो की भीड़ लगी रहती थी।एक हुक्के से
करीबन 4 से 5 लोग एक दूसरे के जूठे हुक्के पीते थे जिसकी वजह से कोरोना फैलने का माहौल बना हुआ था।स्थानिक निवासियों ने बात की शिकायत पोलीस थाने में कई थी लेकिन कोई कार्यवाही नही की गई।जब स्थानिक लोगो ने दुबे से इस बात की शिकायत की तब दुबे ने मुंबई पोलीस के आला अधिकारियों को इस बात की जानकारी देकर कार्यवाही करवाई इस बात से नाराज होकर कुछ अधिकारियों ने हुक्के वाले का इस्तेमाल करके दुबे पे हुक्के वाले से मिलकर गलत शिकायत कराई।
उसी तरह घाटकोपर के एक पोलीस उपनिरीक्षक ने लॉकडाउन में घाटकोपर के भटवाड़ी इलाके में चल रहे अक्षय बार पे कार्यवाही ना करने के नाम पर 20 हजार की मांग की और पैसे लेकर उस बार मालिक को बिना कोई कार्यवाही किये छोड़ दिया।
दुबे ने इस बात की शिकायत ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ सह पोलीस आयुक्त विश्वास नागरे पाटिल को की लेकिन इस जांच को भी घाटकोपर के कुछ अधिकारियों ने दबा दी।
इस वजह से यह पोलीस उपनिरीक्षक बदले की भावना मन में रखते हुवे दुबे के खिलाफ साजिश रचने लगा और पोलीस थाने में दलाली करने वाले लोगो से मिलकर अवैध धंधे वालो से झूठी शिकायत दर्ज करके दुबे पे फ़र्ज़ी मुकदमा दर्ज किया।
दुबे को बिना नोटिस दिया अवैध तरीके से गिफ्तारी की और पोलीस कस्टडी में गाली गलौच और मारपीट की दुबे के प्राइवेट पार्ट पे सिगरेट से चटका दिया।अवैध धंधे वालो को बुलाकर खुद उनको बयान में क्या दर करना है बताकर उनका बयान दर्ज कराया।दुबे के मोबाइल से छेड़छाड़ करके सभी सबूत नष्ट किये पोलीस निरीक्षक दत्ताराम गिरप से मिलकर पोलीस थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज को नष्ट किया।
दुबे ने फुटेज की मांग आरटीआई में की लेकिन आरटीआई में फुटेज ना देकर दुबे पे हुवे अन्याय और बेगुनाही के सबूत नष्ट किये।
दुबे के परिवार वालो से एक लाख रुपये की मांग की गई और पैसा ना देने पर हाथ मे हथकडी लगाकर दुबे को पैदल इलाके में घुमाकर मानसिक त्रास दिया।
घाटकोपर में कुछ महीनों पहले एक फ़र्ज़ी आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था।इस मामले में भी शिकायत की गई कि इस मामले में मोटी रक्कम ली गई है।इस मामले पे भी कोई कार्यवाही नही की गई।
घाटकोपर पोलिस थाने में गैरकानूनी तरीके से 1 बिना अनुमति लिए अवैध 10 से 12 एयर कंडीशनर लगाए गए है।
इस बात की जानकारी दुबे ने आरटीआई में मांगी आरटीआई में गलत जानकारी दी गयी कि केवल एक एयर कंडीशनर लगा है यह एयर कंडीशनर कहाँ से आये किसने लगाए किसके फण्ड से लगाए गए इस बात की जानकारी घाटकोपर के अधिकारियों को नही है।सूत्रों के मुताबिक यह एयर कंडीशनर अवैध धंधे वाली ने लगाए है जिनको पोलिस संरक्षण देती है।
अवैध एयर कंडीशनर लगाने वाले अधिकारियों पे भी कार्यवाही की मांग दुबे ने की थी।
इस तरह दुबे ने कई भ्रष्टाचार जनता के सामने लाए थे।इस लिए कई भ्रष्ट पुलिस अधिकारी दुबे के प्रति मन में गलत विचार और बदले की भावना रखने लगे।
दुबे ने बताया कि हाथी के दांत की तस्करी करने वाले लोगो के खिलाफ घाटकोपर में मामला दर्ज किया गया था।जिसका केस क्रमांक 411/2020 है इस मामले में कुल 10 लोगो को पोलीस ने पकड़ कर लाया था और दो दिन बिना केस दर्ज किए उनसे वसूली करती रही दो दिन बाद केवल 2 लोगो पे एफआईआर दर्ज की गई और इस मामले में मुख्य आरोपी जमील और उसके 7 साथियों को पैसे लेकर छोड़ दिया गया।
इस मामले की जांच भी पोलीस निरीक्षक गिरप के पास थी जिसपे कोई कार्यवाही नही की गई।
घाटकोपर में ब्याज माफियाओं का आतंक फैला हुआ था गरीबो को 10 से 15 प्रतिशत पे पैसे देकर उनका शोषण किया जा रहा था।गरीबो को बेरहमी से मारपीटा जा रहा था।कई लोगो के घर हड़प लिए गए थे पीड़ित लोगों की घाटकोपर पोलिस थाने में कोई सुनवाई नही होती थी।इस बात की जानकारी मिलते ही दुबे ने कई पीड़ितों की सहायता की उनके घर उनको दिलाने में उनकी कानूनी सहायता करवाई।
ऐसे तमाम लोगो जो ब्याज का धंधा करते है जिनके खिलाफ घाटकोपर पोलीस थाने में काजी शिकायते दी गयी है लेकिन पोलीस ऐसे लोगो पे कोई कार्यवाही नही करती या नाम मात्र की कार्यवाही करती है।
ऐसे तमाम लोगो को दुबे के खिलाफ इस्तेमाल कर घाटकोपर पोलीस थाने ने फ़र्ज़ी मुकदमे दर्ज किए
दुबे ने इस मामले कि शिकायत मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, राजपाल,पोलीस महासंचालक, पोलीस आयुक्त से की है जिसकी जांच संबधित अधिकारी को भेजी गई है जिसपर कोई कार्यवाही ना करते हुवे ऐसे अधिकारियों को बचाया गया है।
दुबे ने बताया कि सचिन वाझे और डीसीपी सौरभ त्रिपाठी तो सिर्फ मोहरा है इनसे भी खतरनाक अधिकारी घाटकोपर थाने में है जिनको बेनकाब करने के लिए दुबे ने अब बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है दुबे ने कहां की उनको डॉ. बाबासाहेब कर लिखे भारतीय संविधान पर पूरा भरोसा है दुबे नर खुद पे दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट से दरख्वास्त लगाई है।
ऐसे अधिकारियों को दुबे से खतरा उत्पन हो गया था इस लिए जबरन अपने पद का दुरुपयोग करते हुवे एक पत्रकार को हद्दपार का आदेश दिया गया।दुबे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार से भी इस मामले की शिकायत की है और महाराष्ट्र राज्य पोलीस तक्रार केंद्र में भी ऐसे अधिकारियों पे सख्त कार्यवाही की मांग की है।दुबे ने बताया कि जहां ईमानदार छवि वाले पोलीस आयुक्त संजय पांडे मुंबई पोलीस की छवि सुधारने का प्रत्यन कर रहे है वही ऐसे अधिकारी लगातार मुंबई पोलीस की छवि खराब कर रहे है।दुबे के अनुसार अगर ऐसा ही हाल रहा और भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं है जब मुंबई पुलिस से जनता का विश्वास खत्म हो जाएगा।