मुंबई: आज-कल देश में कुछ भी हलचल होती है, तो उसका मीम बन जाता है। इन दिनों मीम के निशाने पर नींबू है, जो दस रुपये में मिल रहा है। वैसे, नींबू के अलावा भी आम आदमी की एक पौष्टिक थाली में ऐसी कई चीजें हैं, जिनके दो सालों में दाम बढ़े हैं। नवभारत टाइम्स की इस महंगाई विशेष सीरीज में हम पिछले एक-डेढ़ साल की तुलना करते हुए एक पौष्टिक थाली का विश्लेषण करेंगे। एक सामान्य व्यक्ति जिसे स्वस्थ रहने के लिए यदि पौष्टिक आहार लेना हों, तो उसकी थाली में संतुलित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा और फाइबर होना चाहिए। आमतौर पर भारतीय घरों में दाल से प्रोटीन, चावल और चपाती से कार्बोहाइड्रेड, घी या तेल से वसा और सलाद से फाइबर लेने की परंपरा रही है। हम एक सामान्य व्यक्ति के लिए गेंहू की रोटी, एक कटोरी दाल, एक कटोरी हरी सब्जी, थोड़े से चावल और प्याज-टमाटर-ककड़ी की सलाद को पौष्टिक थाली के मुख्य अवयव मानकर चलते हैं।
-रूस और युक्रेन से मिलकर दुनिया में 29 प्रतिशत गेहूं, 19 प्रतिशत मक्का और 80 प्रतिशत सनफ्लॉवर ऑयल निर्यात करते हैं। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है।
-पौष्टिक थाली को महंगा करने का एक प्रमुख घटक है रसोई गैस जिसके दाम पिछले दो सालों में करीब 35% बढ़े हैं। सरकार बताती है कि इंटरनैशनल मार्केट में कीमतें बढ़ने का असर भारत में भी हुआ है।
-भारत में एलपीजी गैस के दाम इंटरनैशनल पेट्रोलियम दाम के हिसाब से तय होते हैं। सउदी आरामको ने मार्च 2022 में प्रति मेट्रिक टन एलपीजी के दाम 769.1 डॉलर तय किए थे। ये दाम नवंबर 2020 के (376.3 डॉलर)मुकाबले 104 प्रतिशत अधिक हैं।
-पौष्टिक थाली की कीमत बढ़ाने के लिए घरेलू गैस जितने ही जिम्मेदार पेट्रोल या डीजल भी है क्योंकि जहां से उत्पादन होता है वहां से आपके घर तक माल पहुंचने के दौरान कई बार ट्रांसपोर्ट होता है।
-देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसका सीधा असर थोक मंडी या सब्जी मंडी से लोकल मार्केट में सामान के ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है क्योंकि लोकल ऑपरेटरों ने माल ढुलाई की कीमत बढ़ाई है।
-कई गृहणियां अब गैस की बचत के लिए इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल करने लगी है। इससे गैस की बचत होती है, इलेक्ट्रिसिटी का भी ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता और खाना जल्दी पकता है।
-सामान्य तौर पर एक पौष्टिक थाली में ज्यादा कटौती होती नहीं है लेकिन कुछ गृहणियां रोटी पर घर की मलाई से बने घी का इस्तेमाल करती हैं। थाली में थोड़ी बहुत कटौती सलाद में होती है और सीजन के हिसाब से सब्जियां ज्यादा कम होती है। मसलन, प्याज महंगे होने पर मूली, ककड़ी महंगी होने पर गाजर इत्यादि का इस्तेमाल होता है।





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