मुंबई। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य की किलों का विकास करते समय उनकी पवित्रता बनाई रखी जाए और मूल स्वरूप में ही उनका विकास होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए नियुक्त वास्तुकारों की तरफ से किलों की संरक्षण योजना अगले तीन माह में पेश की जाए। इस प्रारूप में किलों का संवर्धन किस पद्धति से किया जाएगा, इसकी जानकारी प्रदान की जाए।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने निर्देश दिया कि जलदुर्ग सहित किलों के इतिहास को समझकर और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करके आर्किटेक्ट्स को इन योजनाओं को तैयार करना चाहिए। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को सांस्कृतिक कार्य विभाग की विभिन्न विषयों की समीक्षा की। इसमें प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार, महावारसा सोसाइटी की स्थापना करना और गड-किलों का संवर्धन आदि विषय शामिल थे। बैठक में ठाकरे ने 6 गड-किलों राजगड, तोरणा, शिवनेरी, सुधागड, विजयदुर्ग और सिंधु दुर्ग के संरक्षण-संवर्धन के काम की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही इस बारे में दुर्ग प्रेमी संगठनों की बैठक फिर से आयोजित करने और इन संगठनों को उनके क्षेत्र में गड-किलों की स्वच्छता रखने की काम देने पर विचार किया जाए।





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