Home Maharashtra मंकीपॉक्स टेस्टिंग किट : मिनटों में मंकीपॉक्स का लगेगा पता

मंकीपॉक्स टेस्टिंग किट : मिनटों में मंकीपॉक्स का लगेगा पता

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मुंबई, कोरोना संक्रमण के बाद अब दुनियाभर में मंकीपॉक्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। विश्व में बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार भी सतर्क हो गई है। हालांकि यह रोग अभी हिंदुस्थान में नहीं पहुंचा है परंतु इसी बीच एक मेडिकल उपकरण बनानेवाली स्वदेशी कंपनी के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। कंपनी ने दावा किया है कि उसने मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर-आधारित किट बना ली है, जो मिनटों में रिजल्ट बता देगी। इससे संक्रमित रोगियों की जांच करने में आसानी होगी। दुनियाभर में मंकीपॉक्स वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। देखते ही देखते दुनिया के २० से अधिक देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आ चुके हैं। अब तक करीब २०० से अधिक मंकीपॉक्स मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इस नए संकट के बीच राहत की बात यह है कि हिंदुस्थान में अभी तक मंकीपॉक्स नहीं पहुंचा है। देश में मंकीपॉक्स का अभी तक एक भी मामला नहीं मिला है। हालांकि इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए इससे बचाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बीच चेन्नई स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कंपनी ने मंकीपॉक्स के संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर आधारित एक किट विकसित कर ली है, जिससे कुछ ही मिनट में इसके संक्रमण का पता लगाया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि मंकीपॉक्स वायरस के सामुदायिक प्रसार की आशंका है। वैश्विक संक्रामक खतरों की तैयारियों के लिए डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अगर सही उपाय किए जाएं तो यह बीमारी इस समय समायोजित है। फिलहाल इस समय मंकीपॉक्स के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण की आवश्यकता नहीं है, लेकिन टीकाकरण उन लोगों के लिए उपलब्ध है, जिनका संक्रमित लोगों के साथ निकट संपर्क रहा है।
कंपनी ने अपनी किट के बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि ट्रिविट्रॉन का मंकीपॉक्स रियल-टाइम पीसीआर किट चार रंग का फ्लोरोसेंस आधारित किट है। इसमें लिया गया सैंपल सिंगल रिएक्शन फॉर्मेट में चेचक और मंकीपॉक्स के बीच अंतर कर सकता है। इस किट से जांच रिपोर्ट काफी कम समय में आ जाता है। इतना ही नहीं, वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया में रखे ड्राई स्वैब और स्वैब दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।