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9000 फायर हाईड्रेंट के वॉल और चाबी चोरी!

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मुंबई, ब्रिटिश काल में मुंबई में जरूरत के समय आग बुझाने के लिए लगभग दस हजार से अधिक फायर हाईड्रेंट लगाए गए थे। इनमें से लगभग ९ हजार फायर हाईड्रेंट के वॉल और चाबी चोरी होने से बंद पड़े हैं। इसका खुलासा होने के बाद इसे एक बार फिर शुरू करने की मांग की जा रही है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण भी तेजी से हुआ है। शहर में किसी भी जगह पर अचानक आग लग जाने पर पानी की सबसे अधिक जरूरत पड़ती है। इसके लिए ब्रिटिश काल के समय मुंबई शहर में जगह-जगह साढ़े दस हजार फायर हाईड्रेंट लगाए गए थे, जिससे आग लगने पर उसे तुरंत बुझाने में मदद मिलती थी लेकिन आज शहरभर में लगे लगभग ९ हजार फायर हाईड्रेंट बंद पड़े हैं। इसका प्रमुख कारण है, इनके वॉल और चाबी गायब हैं। आग लगने की स्थिति में इन फायर हाईड्रेंट की मदद से फायर ब्रिगेड पानी लेता था लेकिन रोड की ऊंचाई बढ़ने के कारण यह फायर हाईड्रेंट लगभग बेकार पड़े हैं। सायन, केईएम और टाटा अस्पताल में लगाए गए फायर हाईड्रेंट काम नहीं कर रहे हैं। इसका खुलासा आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
फायर ब्रिगेड के नियमों के अनुसार हर ३० मीटर के बाद एक फायर हाइड्रेंट होना चाहिए। कई जगहों पर तो सड़कों की मरम्मत और विस्तार करते समय ये हाइड्रेंट्स हटा दिए गए हैं। जानकारी अनुसार बीएमसी पहले ही नए फायर हाइड्रेंट लगाने और मरम्मत करने पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है। अपने बेड़े में नए और हाइटेक वाटर टैंकर शामिल करने की वजह से फायर विभाग इन फायर हाइड्रेंट की उपेक्षा हो रही है। शहरभर में लगे फायर हाइड्रेंट पुराने हो गए हैं। इन फायर हाइड्रेंट में २४ घंटे पानी उपलबध नहीं है। पहले सात फाइलिंग सेंटर था, अब इसे बढ़ाकर ५० कर दिया गया है। इसके साथ ही पहले अग्निशमन दल के पानी टैंकर चार हजार लीटर क्षमता के थे अब इसे बढ़ाकर ५० हजार लीटर का टैंकर हो गया है। अत: इन फायर हाइड्रेंट की अधिक जरूरत नहीं पड़ती है फिर भी इन फायर हाइड्रेंट को मरम्मत करने का कार्य मुंबई अग्निशमन दल द्वारा किया जा रहा है।