मुंबई, बंबई उच्च न्यायालय ने अपने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने की आरोपी गर्भवती महिला को यह कहते हुए अग्रिम जमानत दे दी है कि महिला और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करना अदालत का कर्तव्य है. न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की अवकाशकालीन पीठ ने 30 मई के अपने आदेश में कहा, ”महिला के खिलाफ दर्ज अपराध गंभीर है, लेकिन याचिकाकर्ता गर्भवती महिला है, इसलिए यह सुनिश्चित करना अदालत का कर्तव्य है कि उसकी और बच्चे की रक्षा की जाए.” आदेश की एक प्रति बुधवार को उपलब्ध कराई गई थी.
महिला बनने वाली है मां
महिला अश्विनी सोनवणे मृतक के बच्चे की मां बनने वाली हैं. वह छह महीने की गर्भवती हैं. उसने अपने ससुर द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के उपरांत इस साल अप्रैल में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत पुणे के यवत पुलिस स्टेशन में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तारी की आशंका के मद्देनजर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.
पति ने अप्रैल में किया था आत्महत्या
सोनवणे के पति राहुल द्वारा अप्रैल में कथित तौर पर आत्महत्या करने के बाद यह शिकायत दर्ज कराई गई थी. मृतक के पिता ने दावा किया है कि सोनवणे ने उनके बेटे को धोखा दिया है और घटना से एक महीने पहले, उसने (सोनवणे ने) उनके बेटे के साथ झगड़ा किया था और अपने माता-पिता के घर चली गई थी. हालांकि, सोनवणे ने अपनी याचिका में आरोपों का खंडन किया और दावा किया है कि उसके ससुर उससे दहेज की मांग कर रहे थे, जिसके कारण उसका पति तनाव में था.





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