मुंबई, मोदी राज में चरणबद्ध बढ़ती महंगाई से आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पिछले महीने जीएसटी की नई दरें लागू की गई थीं, जिसके बाद दो रोज पहले सीएनजी की दरों में एक बार फिर वृद्धि होने से महंगाई की आग के और भड़कने की आशंका प्रबल हो गई है। वैसे तो हर वर्ग इसकी मार भुगत रहा है। लेकिन मुंबई में काली-पीली टैक्सी चलाकर मुंबइकरों की सेवा करने और अपना तथा परिवार का गुजर-बसर करनेवाला सीएनजी की कीमतों में वृद्धि से कुछ ज्यादा ही हताश नजर आ रहा है। काली-पीली चालकों ने ‘मन की बात’ कहते हुए कहा कि अब वॉचमैनी करना टैक्सी चलाने से बेहतर हो गया है। अच्छे दिन का झांसा देकर सत्ता में आई वेंâद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए टैक्सी चालक पूछ रहे हैं कि क्या यही अच्छे दिन हैं। वे मोदी सरकार पर सब सत्यानाश करने का आरोप भी लगा रहे हैं।
सीएनजी की दरों में हाल ही में एक बार फिर वृद्धि होने से काली-पीली टैक्सीचालकों की परेशानी और बढ़ गई। वर्तमान में सीएनजी की कीमत बढ़कर ८६ रुपए पहुंच गई है। महंगी होती सीएनजी के कारण टैक्सी का खर्च, मेंटेनेंस आदि का खर्च ७५ से ८० फीसदी हो गया है। इससे टैक्सी चालकों की बचत बेहद घट गई है। दिनभर की मशक्कत के बाद पूरी कमाई का २० से २५ फीसदी हिस्सा भी बचाना मुश्किल हो गया है। इसमें बचत पर टैक्सी चलानेवालों का हाल सर्वाधिक बुरा है। दक्षिण मुंबई निवासी संदीप मौर्य का कहना है कि १२ घंटा बचत की टैक्सी चलाकर महज ३५० से ४०० रुपए ही कमा पा रहे हैं। मौर्य के मुताबिक दिनभर की मेहनत के बाद प्रति माह १२ हजार रुपए ही कमाई हो पाती है। ऐसे में वॉचमैनी करना ज्यादा अच्छा है। वॉचमैनी में १२ से १५ हजार रुपए आराम से वेतन मिल जाता है, इसके अलावा ओवर टाइम भी मिल जाता है। साथ ही खाने और रहने की परेशानी भी नहीं रहती है। वहीं टैक्सी चालक घनश्याम गुप्ता का कहना है कि सरकार टैक्सी चालकों के बारे में कुछ नहीं सोच रही है। रोजाना सीएनजी के दाम बढ़ रहे हैं। मेहनत करने के बाद भी कुछ भी ढंग की कमाई नहीं हो रही है। ऐसे में एक-एक कर चालक टैक्सी की चाबी थमाकर टैक्सी स्टैंड पर खड़ी कर रहे हैं। इसी तरह काली-पीली टैक्सी मालिक अवधेश जायसवाल का कहना है कि मेरे पास तीन टैक्सियां हैं। एक मैं खुद चलाता हूं और दो टैक्सी बचत पर चलने के लिए देता हूं लेकिन जबसे सीएनजी के दाम बढ़ने शुरू हुए हैं बचत पर टैक्सी चलानेवाले चालकों ने टैक्सी से किनारा कर लिया है।





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