मुंबई, बीते कुछ महीनों से मुंबईकरों पर वायरल बीमारियों का जोरदार हमला शुरू है। बड़ी संख्या में लोग बुखार, खांसी, बदन दर्द, उल्टी थकान, निमोनिया जैसी शिकायतों के साथ अस्पतालों और दवाखानों में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। चिंता कीr बात यह है कि खून की जांच करने के बावजूद विशेष बीमारी नजर नहीं आ रही है। फिलहाल डॉक्टर मरीजों में दिखाई देनेवाले लक्षणों के आधार पर इलाज कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मुंबई मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार डेंगू, मलेरिया और लेप्टो जैसे मौसमी रोगों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसलिए एक तरफ वायरल और दूसरी तरफ मौसमी जैसी बीमारियों के कारण मुंबईकर असमंजस में हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह खांसी कुछ समय तक बनी रहे तो निमोनिया की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वर्तमान में इस वायरल बीमारी के साथ-साथ मच्छर जनित बीमारियों में भी काफी वृद्धि हुई है।
जेजे अस्पताल के मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुकर गायकवाड़ ने कहा कि किसी भी बुखार संबंधी बीमारी को नजरअंदाज न करें। यदि आप बीमार हैं तो डॉक्टर से जरूर परामर्श लें। रोग की प्रकृति छोटी या बड़ी है, इसका निर्णय स्वयं न करें और खुद ही दवा न लें अन्यथा रोग बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ बीमारियों का पता लगाने के लिए खून की जांच की आवश्यकता होती है। इसलिए सही समय पर सही टेस्ट करने की जरूरत है।
जनरल फिजिशियन डॉ. श्रीजित शिंदे का कहना है कि सरल शब्दों में कहें तो यह बैक्टीरिया या वायरल फंगस के कारण होने वाला फेफड़ों का संक्रमण है। कई मामलों में तो मरीज के फेफड़ों में पानी भर चुका होता है। यह श्वसन रोग बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए अगर एक निश्चित समय के बाद भी खांसी बंद न हो तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। कारण अगर समय पर डॉक्टर से सलाह न ली जाए तो निमोनिया जटिलताएं पैदा कर सकता है।





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