मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मचे घमासान के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब महाराष्ट्र विधानसभा का 20 फरवरी को विशेष सत्र होगा। इसमें मराठा समुदाय की विभिन्न मांगों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहले भी विधानसभा का सत्र बुलाने के संकेत दिए थे, लेकिन अब मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद मराठा समुदाय की मांगों पर विधानसभा में चर्चा की जाएगी।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं और आरक्षण के मुद्दे पर किए गए वादों को पूर करने के लिए कह रहे हैं तो वहीं दूसरी राज्य में कैबिनेट मंत्री मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट देकर ओबीसी में शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। इस सब के बीच सरकार ने विधानसभा का सत्र बुलाया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच लंबे समय से विपक्ष की तरफ से भी विधानसभा का सत्र बुलाने जाने की मांग की जा रही थी। विधानसभा का यह सत्र एक दिन का होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का यह फैसला ऐसे वक्त पर किया है। जब मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने बीड जिले में बंध बुलाया था। जरांगे बीड के पड़ोसी जालना जिले के अंतरवाली सराटी अनशन पर हैं। अनिश्चितकालीन अनशन के पांचवे दिन सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की मंजूरी दी है। बीड जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नंदकुमार ठाकुर ने बताया बंद शांतिपूर्ण रहा और दोपहर तक 70-80 फीसदी सफल रहा। इससे पहले मैंने संबंधित नेताओं के साथ बैठक की और शांति की अपील की। बीड शहर में स्कूल और जिले में कुछ बाजार बंद हैं। जरांगे मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समूह में शामिल करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे हैं





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