मुंबई : वर्ष 2014 के चुनाव से पहले चर्चित हुए महाराष्ट्र सदन मामले में कालाधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में जारी रहने की बात स्पष्ट हो गई है। इस मामले में जिस तरह भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने आरोपियों को बरी किया है, उसी तरह डेवलपर को भी कालाधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज अपराध से बरी किया जाना चाहिए। विशेष न्यायालय ने चमनकर एंटरप्राइजेज के अविनाश, प्रशांत और प्रसन्ना चमनकर भाइयों की मांग को खारिज कर दिया है।
कालाधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय सीधे मामला दर्ज नहीं कर सकता। हालांकि, पहले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय में अलग से मामला दर्ज किया जा सकता है। वर्ष 2015 में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने महाराष्ट्र सदन मामले में मामला दर्ज किया था। हालांकि, डेवलपर चमनकर भाइयों को इस अपराध से बरी कर दिया गया था। इसलिए, चमनकर भाइयों ने कालाधन निवारण अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय में दोषमुक्ति के लिए आवेदन किया था। हालांकि, इस अर्जी को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है और कहा है कि इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी।





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