मुंबई: मुंबई से मांडवा जा रही एक बोट के बीच समुद्र में हादसा ग्रस्त हो जाने से 130 यात्रियों एवं बोट पर सवार चालक दल के सदस्यों की जान संकट में पड़ गई थी। राज्य के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने गहन जांच के आदेश दिए हैं। वहीं महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड ने मुख्य सर्वेक्षक एवं समुद्री इंजीनियर प्रकाश चव्हाण के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति दुर्घटना की विस्तृत एवं गहन जांच करके तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
मिली जानकारी के अनुसार, अजंता कैटामारन कंपनी की एक यात्री बोट शुक्रवार को शाम 5.30 बजे के दौरान मांडवा के लिए रवाना हुई थी। बोट मांडवा जेट्टी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर थी। इसी दौरान बीच समुद्र में तेज हवा और लहरों के जोरदार प्रहार की वजह से बोट में सुराख हो गया और पानी भरने लगा।
बोट पर सवार चालक दल के सदस्यों ने तुरंत मांडवा जेट्टी के अधिकारियों को बोट के हादसाग्रस्त होने की सूचना दी तथा मदद की मांग की। मदद पहुंचने तक चालक दल के सदस्य बोट में भर रहे पानी को तेजी से खाली करने में जुट रहे तो वहीं यात्रियों को भी ढाढस बंधाते रहे ताकि कोई यात्री कोई अप्रत्याशित कदम न उठा ले।
4 महीने पहले भी हुआ था हादसा
याद दिला दें कि मुंबई के कोलाबा क्षेत्र अंतर्गत गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा जाने वाली नीलकमल नामक एक यात्री बोट करीब 4 महीने पहले भी हादसे का शिकार हो गई थी। नीलकमल बोट को बूचर द्वीप के पास नेवी की एक गश्ती बोट ने टक्कर मार दी थी, जिसकी वजह से नीलकमल बोट बीच समुद्र में पलट गई थी। उस हादसे में नेवी के 4 जवानों सहित नीलकमल पर सवार 9 यात्रियों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी।





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