मुंबई : लोगों की सहनशीलता के अंत का इंतजार मत करो। करदाता नागरिकों को अपने घरों में जाने के लिए या फुटपाथ पर चलने के लिए जगह नहीं दी गई तो एक दिन लोग हथियार उठा लेंगे और फेरीवालों पर हमला करेंगे, ऐसी गंभीर चेतावनी मुंबई उच्च न्यायालय ने मनपा के संबंधित विभाग को दी है। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि बर्दाश्त करने की एक सीमा होती है।
कुलाबा के निवासियों ने कहा कि हमारी बिल्डिंग के ठीक सामने फेरीवाले गाड़ी लगा रखे हैं, जिससे हमें घर जाने में दिक्कत होती है। उन्होंने अदालत में अर्जी देकर कहा है कि अगर हम उन्हें हटाने जाते हैं तो वे हमें धमकाते हैं। ऐसा आवेदन अदालत में कुलाबा के लोगों ने किया है। इस पर न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कुलाबा के नागरिक फेरीवालों के खिलाफ शिकायत करते हैं, तो पुलिस को सीधे मामला दर्ज करके जांच करनी चाहिए। अदालत ने पुलिस को चेतावनी दी कि वह सुनिश्चित करे कि आरोपी बरी न होने पाएं।
न्यायालय ने स्वत: संज्ञान याचिका दायर कर मुंबई में अनधिकृत फेरीवालों का मुद्दा उठाया है। अदालत ने मनपा को बहस के लिए समय देते हुए मूल याचिका पर सुनवाई १९ जून २०२५ तक स्थगित कर दी। गोरेगांव रेलवे स्टेशन के बाहर अनधिकृत फेरीवालों की शिकायत करने वाले एक व्यक्ति की कार पर फेरीवालों ने हमला कर दिया। पीठ को बताया गया कि पुलिस ने केवल एनसी दर्ज की है।





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