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बेलासिस फ्लाइओवर को जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी

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मुंबई : बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहले इस फ्लाइओवर की डेडलाइन अप्रैल 2026 थी, लेकिन ठेकेदारों के साथ मिलकर प्रॉजेक्ट को जल्दी पूरा करने का निर्णय लिया। अब मुंबई निवासी जल्द ही बेलासिस फ्लाईओवर से यात्रा कर सकेंगे, क्योंकि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इसका पुनर्निर्माण पूरा कर लिया है। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि शहर के पूर्व-पश्चिम संपर्क का महत्वपूर्ण साधन माने जाने वाले इस फ्लाईओवर का पुनर्निर्माण 1 अक्टूबर, 2024 को शुरू होने के बाद मात्र 15 महीने और छह दिनों में पूरा हो गया, जो निर्धारित समय सीमा से चार महीने पहले है।
मूल रूप से ब्रिटिश काल में निर्मित, बेलासिस फ्लाईओवर 333 मीटर लंबा है और तारदेव, नागपाड़ा और मुंबई सेंट्रल सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ता है। इसमें 7 मीटर चौड़ा कैरिजवे और पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए दोनों ओर चौड़े फुटपाथ हैं। नए फ्लाईओवर से जांगीर बोमन बहराम मार्ग पर भीड़ कम होने और लगभग दो वर्षों से बाधित महत्वपूर्ण संपर्क बहाल होने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी होने के बाद बेलासिस फ्लाईओवर जल्द ही खुलने वाला है। अंतिम निरीक्षण और सुरक्षा प्रमाणन 6 जनवरी, 2026 तक पूरे हो गए थे। बीएमसी को उम्मीद है कि फ्लाईओवर पर यातायात जल्द ही फिर से शुरू हो जाएगा, जिससे इस आवश्यक बुनियादी ढांचे पर निर्भर हजारों यात्रियों को लाभ होगा।
सूत्रों की मानें तो जिस तरह से कार्नाक ब्रिज का नाम बदल कर ‘सिंदूर’ रखा गया है, इसी तर्ज पर बेलासिस फ्लाइओवर का भी नाम बदले जाने की जानकारी मिली है। हालांकि अब तक इसकी प्रक्रिया और नए नाम पर कोई सुझाव नहीं मिला है। सूत्रों की मानें तो बेलासिस फ्लाइओवर ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था और इसलिए
ऐसा नाम दिया गया है। हालांकि इस नम का भारत की संस्कृति से या फिर महाराष्ट्र की ऐतिहासिक वीरगाथाओं से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए इस नाम को बदलने
की बात कही ज रही है।
बेलासिस फ्लाइओवर की खासियत

जून 2024 में पुराने पुल को ध्वस्त करने के बाद निर्माण तेज गति से शुरू हुआ। 110 करोड़ रुपये की कुल लागत वाले इस प्रॉजेक्ट में बीएमसी 70 करोड़, जबकि रेलवे विभाग 40 करोड़ रुपये दिए। 350 मीटर लंबे इस आधुनिक फ्लाइओवर को केबल-स्टेड डिजाइन के साथ तैयार किया जा रहा है। पुराना पुल सिर्फ तीन लेन का था, जबकि छह लेन वाला यह पुल उसकी तुलना में दोगुनी क्षमता वाला है। स्टील सुपर- स्ट्रक्चर, कंक्रीट नींव और रेलवे पटरियों से 6.5 मीटर की बढ़ी हुई ऊंचाई इसे तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाती है।
सितंबर 2024 में शुरू हुआ था काम
बीएमसी अधिकारियों ने इस परियोजना के शीघ्र समापन का श्रेय नगर निगम पुल विभाग और रेलवे अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी सहयोग को दिया। कार्य आदेश सितंबर 2024 में जारी किया गया था, और निरंतर प्रयासों और सावधानीपूर्वक योजना के कारण परियोजना निर्धारित समय सीमा से काफी पहले पूरी हो गई। बीएमसी के एडिशनल कमिश्नर अभिजीत बांगर ने बताया कि बीते महीनों से वे प्रॉजेक्ट की प्रगति को स्वयं मॉनिटर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रॉजेक्ट समय से पहले पूरा होने की सबसे बड़ी वजह तीन संस्थाओं के बीच कॉर्डिनेशन है, जिसमें बीएमसी, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण और महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन है। काम के दौरान ठेकेदार को किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तुरंत समाधान दिया गया।