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एडवोकेट ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए 39 साल तक लड़ाई लड़ी; कोर्ट में बरी हुए

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नागपुर : महाराष्ट्र स्टेट हैंडलूम कॉर्पोरेशन के सीनियर मार्केटिंग ऑफिसर एडवोकेट सुरेश ढोले ने खुद के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज कराया है। उन्होंने 39 साल तक इस दाग को मिटाने के लिए लड़ाई लड़ी। इस बीच, कोर्ट से उन्हें बरी कर दिया गया और दो मामलों में उन्हें कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का मुआवजा मिला। एडवोकेट ढोले ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी कहानी बताई। कॉर्पोरेशन में डेपुटेशन पर आए सरकारी अधिकारी अहम पद लेना चाहते थे। इस वजह से कॉर्पोरेशन में सीधे नियुक्त अधिकारियों से उनका विवाद हो गया।
वहां से उन्होंने 1986-87 में एडवोकेट ढोले और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में कार्रवाई की। उसके बाद कॉर्पोरेशन की शिकायत पर तहसील पुलिस ने एडवोकेट ढोले के खिलाफ धोखाधड़ी, भरोसा तोड़ने जैसे अपराधों के लिए FIR दर्ज की। साथ ही, कॉर्पोरेशन ने 17.84 लाख रुपये की रिकवरी के लिए सीनियर सिविल कोर्ट में केस दायर किया। इस कोर्ट ने 28 नवंबर, 2011 को धोले के खिलाफ आरोपों को बेबुनियाद बताया और उन्हें 5,000 रुपये का मुआवजा दिया, जबकि फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 जून, 2025 को उन्हें क्रिमिनल केस से बरी कर दिया। इसके अलावा, 18 नवंबर, 2025 को सिविल कोर्ट ने धोले के दायर मानहानि केस में उन्हें 1.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया। हैंडलूम इंडस्ट्री पर असर पड़ा। डेप्युटेशन पर आए सरकारी अधिकारियों के विवाद ने हैंडलूम इंडस्ट्री पर असर डाला। यह पारंपरिक इंडस्ट्री लगभग खत्म हो गई। जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगे, उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। समाज में उनकी बेइज्जती हुई। कुछ अधिकारियों ने तो इस वजह से अपनी जान भी गंवा दी, ऐसा धोले ने दावा किया।