मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर और आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को अब देश के शीर्ष खाद्य नियामक का समर्थन मिला है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के सीईओ रजित पुन्हानी ने मुंढे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि अगर काम करने की इच्छा हो तो मौजूदा संसाधनों के साथ भी रास्ता निकाला जा सकता है।
रजित पुन्हानी ने खाद्य सुरक्षा विभाग में पोस्टिंग को लेकर बनी उस धारणा को भी खारिज किया, जिसमें इसे कई बार ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसे वह महत्व मिलना चाहिए जिसका यह हकदार है। उन्होंने हर राज्य में एक समर्पित फूड सेफ्टी कमिश्नर की जरूरत पर भी जोर दिया। बिना अतिरिक्त कर्मचारियों के कार्रवाई की तारीफ तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में महाराष्ट्र एफडीए ने पिछले कुछ महीनों में खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर प्रवर्तन अभियान तेज किया है। रेस्टोरेंट, फूड बिजनेस, गोदाम और अन्य प्रतिष्ठानों में जांच की जा रही है। नियमों के उल्लंघन के मामलों में लाइसेंस निलंबित करने समेत दूसरी कार्रवाई भी हुई है।
एफएसएसएआई के सीईओ को खास तौर पर इस बात ने प्रभावित किया कि मुंढे ने अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती का इंतजार नहीं किया। मौजूदा टीम और उपलब्ध संसाधनों के साथ ही निरीक्षण और कार्रवाई को तेज किया गया। पुन्हानी ने इसी संदर्भ में कहा कि ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र में इस अभियान के लिए बड़ी संख्या में नए फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मौजूदा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही काम किया गया है। उनके मुताबिक, यह दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण हो सकता है कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करके खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
‘फूड सेफ्टी में पोस्टिंग कोई सजा नहीं’
रजित पुन्हानी ने खाद्य सुरक्षा विभाग में अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़ी धारणा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पहले कई अधिकारी फूड सेफ्टी कमिश्नर बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाते थे और इस तरह की पोस्टिंग को कई बार ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ समझा जाता था। उनके मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से एक स्थापित व्यवस्था मौजूद है। वहां डॉक्टर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी व्यवस्थाएं पहले से विकसित हैं। इसके मुकाबले खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक अपेक्षित प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं मिली।





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