मुंबई : जेल में अपराधियों को जब बंद किया जाता है, तो माना जाता है कि जेल से उनकी आपराधिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। पर मुंबई की आर्थर रोड जेल में हकीकत उससे अलग है। डीआईजी शिवदीप लांडे ने बताया कि इस जेल से एटीएस से जुड़े एक केस के गवाह को पिछले करीब एक महीने से धमकियां दिलवाई जा रही थीं। इसलिए एटीएस ने धमकाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
साल, 2015 में एटीएस ने अंधेरी के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स से कई करोड रुपये कीमत की 115 किलो एमडी ड्रग जब्त की थी। सात लोग उस केस में अरेस्ट हुए थे। इनमें से एक साजिद इलेक्ट्रिकवाला भी था। उसने कई बार जमानत की अर्जी दी, पर वह खारिज हो गई। उस केस में मुकदमा मार्च तक चला। फिर लॉकडाउन की वजह से रुक गया। 26 नवंबर से मुकदमा फिर शुरू हुआ। उससे एक हफ्ते पहले इस केस के कांदिवली में रहने वाले एक प्रमुख गवाह को साजिद इलेक्ट्रिकवाला के पक्ष में गवाही देने के वास्ते किसी सुजीत पडवलकर की तरफ से धमकियां आने लगीं। गवाह ने एटीएस चीफ जयजीत सिंह से संपर्क किया। पडवलकर को ट्रेस करने का आदेश दिया गया और उसे कुछ दिन के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया। पडवलकर ने बताया कि वह गैंगस्टर हरीश मांडिवकर के खासमखास सचिन कोलेकर के आदेश पर यह काम कर रहा था। इसके बाद चारकोप एटीएस के सीनियर इंस्पेक्टर ज्ञानेश्वर वाघ ने सचिन कोलेकर, हरीश मांडिवकर और साजिद इलेक्ट्रिकवाला को भी एक-एक अरेस्ट कर लिया ।
जांच में यह बात सामने आई कि हरीश मांडिवकर जेल से अपने परिवार व जेल से बाहर घूम रहे अपने पंटरों को नियमित चिट भिजवाता था। परिवार के लोग चिट पढ़कर उसकी जरूरत की चीजें जेल में भिजवाते थे, जबकि सचिन कोलेकर व उस जैसे उसके अन्य पंटर कोर्ट की तारीखों के लिए को-ऑर्डिनेट करते थे। साथ ही, गवाहों को धमकाने का भी काम करते या करवाते थे। हरीश मांडिवकर पर संगीन अपराध के एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। मटका किंग सुरेश भगत की हत्या में वह मकोका के तहत कनविक्ट भी हुआ है।





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