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मुंबई में शिवसेना का चुनावी गणित

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बीएमसी में भगवा खतरे में आता देख शिवसेना का नया दांव

बीएमसी चुनाव हारने के डर से शिवसेना ने चला गुजराती कार्ड?

मुंबई : बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी (BMC) के चुनाव की तैयारियां अभी से राजनीतिक दलों ने शुरू कर दी है। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका सत्ता पर काबिज होने का सपना हर राजनीतिक दल देखता है। बीते दो दशकों से भी ज्यादा समय से बीएमसी पर शिवसेना का भगवा लहरा रहा है। शिवसेना अब तक बीजेपी का समर्थन मिलता रहा है लेकिन अब दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ हैं। ऐसे में शिवसेना बीएमसी की सत्ता को किसी भी कीमत पर हाथ से जाने देना नहीं चाहती है। लिहाजा शिवसेना ने मुंबई में रहने वाले गुजराती वोटरों को भी लुभाना शुरू कर दिया है।
गुजराती मतदाताओं के लिए शिवसेना की मुहिम
गुजराती मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए शिवसेना ने खास कैंपेन शुरू की है। इसके लिए एक टैगलाइन भी तैयार की गई है। शिवसेना ने ‘मुंबई मा जलेबी ने फाफड़ा उद्धव ठाकरे आपडा’ टैगलाइन के साथ यह मुहिम शुरू की है। मुंबई महानगर पालिका में 227 सीटें हैं। जिनमें से 50 से 52 सीटों पर गुजराती मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शिवसेना इन सीटों पर अपनी जीत को पुख्ता करना चाहती है। मुंबई में तकरीबन 30 लाख गुजराती रहते हैं।
बीजेपी का वोट बैंक माने जाते हैं गुजराती
मुंबई में गुजराती मतदाताओं को बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। बीजेपी के साथ राजनीतिक दुश्मनी के बाद शिवसेना इस वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। इसीलिए यह कैंपेन शुरू की गई है। हालांकि पहले जब बीजेपी और शिवसेना एक साथ थे। तब हिंदूत्व के मुद्दे पर गुजराती मतदाता शिवसेना को भी मतदान करते थे। शिवसेना ने अपने गुजराती विंग को एक्टीवेट कर दिया है। और पार्टी के वरिष्ठ गुजराती नेताओं को अभी से शहर के सभी गुजराती बाहुल्य इलाकों में जनसंपर्क अभियान शुरु करने के आदेश दे दिया है।
आगामी बीएमसी का चुनाव शिवसेना और बीजेपी अलग-अलग लड़ने वाले हैं। ऐसे में शिवसेना को बीएमसी के सत्ता हाथ से जाने का डर सता रहा है। इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए उन्होंने अभी से गुजराती मतदाताओं को मनाने का काम शुरू कर दिया है। आगामी 10 जनवरी को शिवसेना की तरफ से मुंबई में गुजराती समाज का एक महासम्मेलन आयोजित किया गया हैं।
बीएमसी में सीटों की स्थिती
फिलहाल बीएमसी के सदन में शिवसेना के पास सबसे ज्यादा पार्षद हैं इनकी संख्या 92 है। इसके बाद दूसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी के पास 82 पार्षद हैं। वहीं कांग्रेस के पास 30 पार्षद हैं। जबकि एनसीपी के पास 9 और समाजवादी के पास 6 कॉर्पोरेटर हैं। एमआईएम के पास दो और एमएनएस के पास एक पार्षद है।