मुंबई : देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका बीएमसी का वर्ष 2021-22 का आर्थिक बजट बुधवार को पेश होगा। डेढ़ करोड़ से ज्यादा की आबादी वाली मुंबई को बजट का बेसब्री से इंतजार है और काफी उम्मीदें भी हैं। कोरोना के चलते इस बार बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन से काफी आस आम मुंबईकर से लेकर जनप्रतिनिधि तक लगाए बैठे हैं। बजट में आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए खर्चे में कटौती का भी प्रावधान प्रमुखता से होगा।
बता दें कि बीता वर्ष पूरा कोरोना काल से निपटने में बीत गया। कोरोना काल के शुरुआती दिनों में बीएमसी की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से लड़खड़ाती हुई दिखीं। उपनगरीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों सहित स्वास्थ्यकर्मियों का अभाव खुलकर बीएमसी की स्वास्थ्य सेवाएंकोरोना काल में सामने आया। ऐसा समय आ गया था कि बीएमसी को डॉक्टर्स से लेकर वॉर्ड बॉय, नर्सेस, ऐम्बुलेंस तक आउट सोर्सिंग करनी पड़ी थी। इसके अलावा पेरिफेरल अस्पतालों में यंत्रों के अभाव से पूरा भार प्रमुख अस्पतालों पर बढ़ गया था। इसकी वजह से प्रमुख अस्पताल सिर्फ कोरोना मरीजों के इलाज के लिए समर्पित रहे। इन्हीं कमियों के दूर होने की उम्मीदें और नई स्वास्थ्य योजनाओं के शुरू होने की उम्मीदें इस बार के बीएमसी स्वास्थ्य बजट से लगाई जा रही हैं।
गौरतलब हो कि वर्ष 2020-21 के आर्थिक बजट में बीएमसी ने स्वास्थ्य का बजट 2019-20 के बजट की तुलना में 3 फीसद की वृद्धि की थी। वर्ष 2019-20 में स्वास्थ्य के लिए 4,151 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जो वर्ष 2020-21 में बढ़ाकर 4,260 कर दिया गया। वर्ष 2020-21 के बजट में बीएमसी ने कोरोना से निपटने के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन पूरे वर्ष कोरोना से निपटने के लिए बीएमसी ने करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च किए। संभावना जताई जा रही है कि इस बार बजट में बीएमसी इस तरह की महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ बड़ी घोषणा कर सकती है।





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