मुंबई: अंबानी के घर के बाहर जिलेटिन की छड़ें रखने के मामले की जिम्मेदारी एक आतंकी संगठन ने ली है. उस संगठन ने सोशल मीडिया पर ये जिम्मेदारी ली है. हालांकि गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि कोई संगठन चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहा है. अब तक की जांच में ऐसा कोई लिंक नहीं मिला है.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ये आतंकी संगठन फेमस होने के लिए ऐसा कर रहा है. दिल्ली में एंबेसी के बाहर ब्लास्ट मामले में भी क्लेम किया था लेकिन अब तक की जांच में कोई लिंक नहीं मिला है, ना ही अंबानी मामले में जांच में कोई लिंक मिला है.
वे कौन लोग थे जिन्होंने मुकेश अंबानी के घर के करीब जिलेटिन छड़ों से लदी गाड़ी पार्क की थी, पुलिस अब तक इस सवाल का जवाब हासिल नहीं कर सकी है. लेकिन पुलिस को कई सारे सुराग जरूर मिले हैं जिनसे उसकी जांच आगे बढ़ रही है. पुलिस को साजिश में इस्तेमाल इनोवा गाड़ी की फुटेज मिली है जिससे पता चलता है कि टोल नाके के जरिए आरोपी मुंबई से बाहर जा चुके हैं.
शुक्रवार की शाम को जब दक्षिण मुंबई के पेडर रोड इलाके में जिलेटिन छड़ों से लैस स्कॉर्पियो कार बरामद हुई तो पुलिस महकमे में सबकी सांसें फूल गई. जिस जगह पर ये गाड़ी खड़ी की गई थी वो जगह दुनिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक मुकेश अंबानी के बंगले एंटीलिया से सिर्फ 600 मीटर के फासले पर ही थी. मुंबई पुलिस को सीसीटीवी की जांच के बाद पता चला कि ये स्कॉर्पियो गाड़ी 2 बजकर 18 मिनट पर पार्क की गई थी.
मुंबई पुलिस ने जांच में पास की दुकान का एक सीसीटीवी हासिल किया है जिसमें कार पार्क होते हुए दिखाई दे रही है. पुलिस धीरे-धीरे इस मामले की गुत्थी सुलझाने में सफल होती नजर आ रही है. पुलिस को ये पता चल गया है की जिलेटिन से लदी स्कॉर्पियो कार चोरी की है. इस कार को मुंबई के ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से चुराया गया था. जिस शख्स की ये कार है उससे पुलिस पूछताछ कर रही है.
इस स्कार्पियो कार के साथ एक इनोवा कार भी थी. सीसीटीवी एक अहम सबूत तो है लेकिन इससे यह नहीं पता चलता कि स्कॉर्पियो कार वहां पार्क करने वाला शख्स कौन है क्योंकि जब इनोवा कार वहां से गुजर रही थी तो उसकी आड़ लेकर स्कॉर्पियो के पिछले दरवाजे से वो शख्स निकल भागा. इससे यह पता चलता है कि अपराधियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले उस इलाके का बारीकी से मुआयना किया था और उन्हें पता था कि सी सीसीटीवी कहां लगा हुआ है. कार किसकी है ये पता करने के लिए पुलिस अक्सर कार का चेसिस नंबर और इंजन नंबर की जांच करती है. ये बात आरोपी जानते थे इसलिए उन्होंने ये दोनों नंबर मिटा दिए.





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