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अपनों से मिलाती है यह स्पेशल मिसिंग पुलिस ऑफिसर, गुमशुदगी के 95 फीसद मामलों को सुलझाने में रही कामयाब

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मुंबई, फिरौती के लिए बच्चे के अपहरण का मामला हो या घरों से भागने वाली युवतियों की तलाशी का अभियान, इस जांबाज महिला पुलिस अधिकारी को हर मामला सुलझाने में महारत हासिल है। इसीलिए मालवणी पुलिस थाने में कार्यरत उषा खोसे को मुंबई पुलिस की ‘स्पेशल मिसिंग लेडी ऑफिसर’ कहा जाता है। मुंबई पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 2020 में उषा खोसे ने गुमशुदगी के 90 मामलों में से 87 मामले हल कर रेकॉर्ड कायम किया था, जबकि 2021 में मार्च तक मालवणी पुलिस स्टेशन में दर्ज 15 लापता मामलों में से 13 मामलों को उन्होंने सुलझा लिया है।
पीएसआई खोसे ने बताया कि लोगों की सुरक्षा एवं कानून की रक्षा करने के साथ-साथ ऐसे उदास चेहरों पर मुस्कराहट लाना भी उनका उद्देश्य है, जो बच्चों के अपहरण हो जाने या बहन-बेटी के भाग जाने की वजह से टूट चुके हों। बकौल खोसे, पिछले दिनों मालवणी से एक साल की बच्ची का रेस्क्यू ऑपरेशन कर परिजन को सौंपना उनके पुलिस करियर का सबसे यादगार पल रहा।
सातारा जिले के मूल निवासी खोसे के माता-पिता किसान हैं। कम पढ़े-लिखे अभिभावक होने के बाद भी उन्होंने बेटी को पढ़ाया। खोसे कहती हैं, ‘भगोड़े प्रेमी-प्रेमिका या लापता बुजुर्गों की अपेक्षा अपहृत बच्चों को खोजना जोखिम भरा काम है, जिसके लिए मैं कभी भी पीछे नहीं हटती। माता-पिता की प्रेरणा ने मुझे हमेशा जोखिम उठाने के लिए प्रेरित किया है। शायद यही वजह है कि मैं गुमशुदगी के इतने सारे मामले सुलझाने में कामयाब रही।’
पीआईसी खोसे की काबिलियत को मुंबई पुलिस आयुक्तालय ने भी आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर सराहा है। निश्चित रूप से यह सराहना उनके लिए बड़ा महत्व रखती है। खोसे को अपने काम में जो सफलता मिल रही है, उसकी वजह हैं आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मजबूत नेटवर्क। वह अपने मामा से भी प्रेरणा लेती हैं। उनके मामा डीवाईएसपी हैं। खोसे कहती हैं कि उनके जीवन का मकसद हर किसी को मुस्कराहट देना है। उनका इतना आग्रह जरूर है कि लोगों को पुलिसकर्मियों के साथ अपनेपन से पेश आना चाहिए, क्योंकि वे भी उन्हीं की तरह भावना प्रधान होते हैं।