मुंबई : २२ मार्च, २०२० को देशभर में कोरोना के संकट को देखते हुए ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया था। लॉकडाउन के दौरान श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और मालगाड़ियों के अलावा कोई ट्रेनें नहीं चलीं। जून से सभी ट्रेनों के नंबर के आगे शून्य लगाकर स्पेशल ट्रेनों के नाम से उन्हीं ट्रेनों को शुरू किया गया, जो लॉकडाउन से पहले सामान्य रूप से चलती थीं। इन ट्रेनों से विभिन्न श्रेणियों को हटा दिया गया और स्पेशल चार्ज के नाम पर १०ज्ञ् से ३०ज्ञ् अधिक टिकटों का किराया चार्ज करना रेलवे ने शुरू कर दिया। इस सिलसिले को अब १० महीने हो रहे हैं लेकिन अब भी साधारण ट्रेनों का कोई ठिकाना नहीं। कोरोना महामारी में फेस्टिवल का कोई अता पता नहीं है लेकिन रेलवे को मौका मिल गया और वह फेस्टिवल के नाम पर अभी भी स्पेशल ट्रेन चलाकर देशवासियों को लूट रही है।
लॉकडाउन से पहले मुंबई से करीब २७० मेल एक्सप्रेस ट्रेनें रेलवे रोजाना चलाती थी। इन ट्रेनों से रोजाना लगभग ४ लाख यात्रियों का मुंबई आना-जाना होता था। अब रोजाना स्पेशल ट्रेन के नाम पर करीब १५० ट्रेनें चल रही हैं और इनसे करीब डेढ़ लाख यात्रियों का मुंबई आना-जाना हो रहा है। रेलवे यात्री परिषद के सुभाष गुप्ता कहते हैं कि उत्तर भारत की ओर आने-जानेवाली ट्रेनों में आरक्षित यात्रियों जितनी ही या उससे ज्यादा संख्या सामान्य यात्रियों की होती थी। इसके अलावा रेलवे वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को भी यात्रा की अनुमति देती थी। अब ये दोनों श्रेणी बंद होने के कारण यात्री चाहते हुए भी अभी यात्रा नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही सामान्य श्रेणी में यात्रा करनेवाले लोगों को अब विशेष शुल्क देकर यात्रा करनी पड़ती है जबकि सुविधा रेलवे की वही घटिया दर्जवाली ही मिल रही है।
रेल यात्री गुलाब यादव ने बताया कि रेलवे कोविड स्पेशल के नाम पर अधिक किराया वसूल रही है लेकिन स्पेशल के नाम पर घटिया दर्जे की सेवा रेल यात्रियों को दे रही है। राजधानी सहित अन्य प्रीमियम ट्रेन के यात्रियों को न तो ट्रेन में खाना परोसा जा रहा है और न ही साफ-सफाई के साथ ही चादर-कंबल दिए जा रहे हैं। जबकि टिकट किराए में इन सभी सेवाओं के पैसे रेलवे पहले ही ले लेती है। जब सुविधाएं रेल यात्रियों को नहीं दी जा रही हैं तो ईमानदारी से रेलवे को इन सभी सुविधाओं के एवज में वसूल किए जानेवाले किराए को कम करना चाहिए लेकिन रेलवे मदमस्त हाथी की तरह अपनी ही धुनकी में ट्रेनों का परिचालन कर मनमर्जी के मुताबिक यात्रियों को लूट रही है। ये सरकार जनता की है या फिर पैसे वालों की? ये देश की आम जनता आनेवाले समय में केंद्र में बैठी सरकार को बता देगी।





Users Today : 1
Users Yesterday : 12
Users Last 7 days : 85
Users Last 30 days : 286
Users This Month : 37
Users This Year : 2819
Total Users : 64026
Views Today : 1
Views Yesterday : 12
Views Last 7 days : 98
Views Last 30 days : 384
Views This Month : 43
Views This Year : 3358
Total views : 99381
Who's Online : 0


