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कोरोना से बच्चों को कैसे बचाएं? महाराष्ट्र कोविड टास्क फोर्स ने दिए 3 मंत्र

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मुंबई, मुंबई में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका विशेषज्ञों ने जताई है। इसे देखते हुए रविवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में बाल रोग विशेषज्ञों को मार्गदर्शन और चर्चा सत्र का आयोजन किया गया था। इस चर्चा सत्र के दौरान बच्चों के कोविड टास्क फोर्स के सदस्यों ने बाल रोग विशेषज्ञों को कोरोना से बच्चों के बचाव के लिए 1, 2, 3 का मूल मंत्र दिया है। 1, 2, 3 मूलमंत्र के तहत कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए टास्क फोर्स ने तीन श्रेणी तय की हैं। इसी तीन श्रेणी से बालरोग विशेषज्ञों को अवगत कराया गया।
कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक बताई गई है। इसकी तैयारी राज्य ने पहले से ही शुरू कर दी है। बच्चों के कोविड टास्क फोर्स के गठन और उनके द्वारा दिए सुझाव को राज्य सरकार अमल में ला रही है। रविवार को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बालरोग विशेषज्ञों को कोविड टास्क फोर्स के डॉक्टरों ने मार्गदर्शन किया है। इस दौरान सदस्यों ने बच्चों के उपचारों को लेकर डॉक्टरों की शंकाओं का समाधान किया।
बच्चों के कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ सुहास प्रभु ने मार्गदर्शन करते हुए बाल रोग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन करते हुए कोविड संक्रमित बच्चों का इलाज तीन श्रेणी में करने के लिए कहा। सौम्य, मध्यम और तीव्र स्वरूप के कोरोना लक्षण की पहचान कैसे की जानी चाहिए, इस पर मार्गदर्शन किया। इसके साथ को-मॉर्बिड बच्चों का इलाज, कोविड संक्रमित बच्चों का ध्यान रखते हुए अभिभावकों को क्या करना है? बच्चों का 6 मिनट वॉक टेस्ट, होम आईसोलेशन बच्चों के इलाज के प्रोटोकॉल से भी डॉक्टरों को अवगत कराया गया।
डॉ. प्रभु ने कहा कि अधिकांश मामलों में, एक सप्ताह के समय में पूरी तरह से ठीक होने के साथ एकमात्र लक्षण बुखार हो सकता है। दूसरी कोविड संक्रमित प्रेग्नेंट माताओं से बच्चों को तीव्र संक्रमण होने का खतरा, कोरोना पॉजिटिव अभिभावकों से बच्चों को कोविड होने की आशंका अधिक रहती है। 90 प्रतिशत मामलों में बच्चे बिना लक्षण के पाए जा सकते हैं। 5 प्रतिशत मध्यम और 1-2 प्रतिशत बच्चों को निमोनिया होने की आशंका है।