Home Crime बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका खारिज

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मुंबई. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें गैर-कोविड रोगियों के लिए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम द्वारा देय शुल्कों को विनियमित करने वाली महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगी क्योंकि राज्य सरकार ऐसी अधिसूचनाएं जारी नहीं कर सकती।

महाराष्ट्र सरकार की पैरवी कर रहे वकील राहुल चिटनिस ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि राज्य ने उच्च न्यायालय के पिछले साल 23 अक्टूबर के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें गैर कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए शुल्क की सीमा तय करने संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि वह ऐसे समय में ऐसी अधिसूचनाएं जारी नहीं कर सकती, जब राज्य सरकार के पास सरकारी अस्पतालों में गैर-कोविड रोगियों के इलाज के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा नहीं है। पीठ ने कहा, ‘जब राज्य सरकार के पास बुनियादी ढांचा नहीं होगा तो गैर-कोविड रोगी निजी अस्पतालों में जाने के लिए बाध्य हैं। क्षमा करें, हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’
पिछले साल 23 अक्तूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार के पास गैर कोविड-19 मरीजों के लिए निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम की शुल्क सीमा के नियमन संबंधी कोई अधिसूचना जारी करने या कोई कानून बनाने का अधिकार नहीं है। अदालत ने गैर कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम पर लागू होने वाली राज्य सरकार की पिछले साल अप्रैल एवं मई में जारी दो अधिसूचनाएं खारिज कर दी थीं। अधिसूचनाओं के माध्यम से राज्य सरकार ने गैर-कोविड रोगियों का इलाज करते हुए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए एक शुल्क कार्ड निर्धारित किया था।