Home Crime चेचक, हैजा से भी ज्यादा होगी घातक महामारी!

चेचक, हैजा से भी ज्यादा होगी घातक महामारी!

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मुंबई, कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में हलचल मचा रखी है। यह महामारी अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है और इसकी तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों ने अगले साल २०२२ में कोविड-१९ से भी जानलेवा कोविड-२२ महामारी के लिए सतर्क किया है। इसके साथ ही कुछ विशेषज्ञों ने अब दावा किया है कि कोरोना से भी महाघातक महामारी ६० साल बाद यानी वर्ष २०८० में आने का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये महामारियां पहले की चेचक, हैजा से भी ज्यादा जानलेवा हैं। इसका प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि, खाद्य प्रणालियों में बदलाव, पर्यावरण में बदलाव, मनुष्यों और जानवरों के बीच लगातार अधिक संपर्क में रहना है।
इटली में पडुआ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने एक शोध किया है। इस अध्ययन में पाया गया है कि ६० साल बाद यानी साल २०८० में दुनियाभर में कोरोना वायरस से भी भयंकर महामारी पैâलेगी। इन शोधकर्ताओं ने पिछले ४०० वर्षों में दुनियाभर की लाइलाज बीमारियों के प्रसार पर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि सांख्यिकीय रूप से महामारियां उतनी दुर्लभ नहीं हैं, जितनी पहले मानी गर्इं थीं। आने वाले समय में इनके और अधिक होने की संभावना है। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि एक और बड़ी महामारी की संभावना बढ़ रही है और हमें भविष्य के जोखिमों के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहना चाहिए।
शोध के नतीजे प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। इसके लेखक मार्को मरानी और उनकी टीम ने इसमें नए सांख्यिकीय तरीकों का इस्तेमाल किया। उनके विश्लेषण में पिछली चार शताब्दियों में प्लेग, चेचक, हैजा, टाइफाइड और कई नए फ्लू वायरस शामिल थे। वैज्ञानिकों ने पाया कि पिछली महामारी की आवृत्ति में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। अध्ययन के सह-लेखक विलियम पेंग के अनुसार महत्वपूर्ण शोध यह है कि कोविड-१९ और स्पेनिश फ्लू जैसी प्रमुख महामारियों की अपेक्षाकृत संभावना है। अगर हम समझते हैं कि महामारी इतनी दुर्लभ नहीं है तो भविष्य में रोकथाम और नियंत्रण के प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।