रोहतक, कस्बे में एक ही परिवार के ४ लोगों की हत्या से पूरा देश हिला हुआ है। लोग उस वक्त और हैरान हुए जब पिता, मां, बहन और नानी की हत्या के आरोप में इकलौते बेटे यानी ‘कुलदीपक’ को पुलिस ने गिरफ्तार किया। दावा किया जा रहा है कि २० वर्षीय अभिषेक ने पिता प्रदीप, मां बबली, नानी रोशनी और बहन तमन्ना को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिसिया खुलासे से हर कोई हैरत में है। क्योंकि अभिषेक ने पहले कन्हेली के युवक का और बाद में गांधी वैंâप के कबाड़ी का नाम लेकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया था। इसी बीच गली से पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिली, जिससे बाहर से कोई व्यक्ति आता या जाता दिखाई नहीं दिया। आखिर में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिसिया पूछताछ में खुलासा हुआ है कि बहन के नाम प्रॉपर्टी करने से नाराज अभिषेक ने माता-पिता, बहन व नानी की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि पिता ने उसे होंडा सिटी कार व सवा लाख रुपए वाला एप्पल का फोन तक दे रखा था, जबकि वह खुद स्कूटी पर चलता था। फिर भी घर के चिराग ने पूरे परिवार को चिता पर पहुंचा दिया। इस घटना से करीब ८ साल पहले उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल क्षेत्र में घटी ऐसी ही एक अन्य घटना के घाव हरे हो गए। यह भी इत्तफाक ही है कि टिहरी-गढ़वाल क्षेत्र में घटी घटना के मामले में आरोपी बेटे को सत्र न्यायालय ने बीते मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई है।
मामला नई टिहरी के गजा तहसील अंतर्गत गुमाल गांव का है। यहां राम सिंह अपने परिवार संग रहते थे। १३ दिसंबर, २०१४ को राम सिंह के छोटे बेटे संजय सिंह का परिजनों से किसी बात पर विवाद हो गया था, जिसके बाद संजय ने अपनी ५८ वर्षीया मां मीना देवी, ३४ वर्षीय भाई सुरेंद्र सिंह और २५ वर्षिया गर्भवती भाभी कांता देवी को तलवार से काट डाला था। इस घटना के बाद राम सिंह ने अपने हत्यारे बेटे संजय के खिलाफ खुद केस दर्ज कराया था। राम सिंह ने नायब तहसीलदार गजा को दी तहरीर में बताया था कि उसके बेटे संजय सिंह ने अपनी मां मीना देवी, भाई सुरेंद्र सिंह और गर्भवती भाभी कांता देवी की मामूली विवाद के बाद तलवार से हत्या कर दी है, जिसके बाद नायब तहसीलदार ने राजस्व पुलिस चौकी क्वीली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। तत्कालीन ग्राम प्रधान सहित कई लोगों ने घटना की तस्दीक की। राजस्व पुलिस ने घटनास्थल से तलवार के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया था। इस घटना से अभियुक्त संजय के पिता राम सिंह इस कदर आहत थे कि दो महीने बाद ही उनकी भी मौत हो गई।
सीजेएम कोर्ट ने परीक्षण के बाद १० फरवरी, २०१५ को मामला सेशन कोर्ट के सुपुर्द कर दिया। तबसे यह मामला सत्र न्यायालय में विचाराधीन था। मंगलवार को एडीजे रमा पांडेय की अदालत में मामले पर बहस हुई। अपने परिवार संग हैवानियत को अंजाम देनेवाले दोषी संजय सिंह को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। ७ साल तक चले केस के बाद मंगलवार को एडीजे रमा पांडेय की अदालत में मामले पर बहस हुई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर और रेयर ऑफ द रेयरेस्ट पाते हुए दोषी को कठोरतम दंड से दंडित करने का निर्णय लिया। कोर्ट ने अभियुक्त संजय को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। उस पर ५ हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।





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