Home Crime सेक्स वर्कर्स का दर्द बयां करती है डॉक्यूमेंट्री मुंबई ४००००८

सेक्स वर्कर्स का दर्द बयां करती है डॉक्यूमेंट्री मुंबई ४००००८

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मुंबई, कोरोना महामारी ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। इनमें निचले पायदान पर आनेवाले सेक्स वर्कर्स भी शामिल हैं। मुंबई के कमाठीपुरा में करीब ७,००० सेक्स वर्कर्स रहती हैं। महामारी के दौरान जब संचारबंदी हुई थी तब इनकी दशा अत्यंत दयनीय हो गई थी। उनका धंधा-पानी सब बंद हो गया था और वे दाने-दाने को मोहताज हो गई थीं। क्राइम रिपोर्टर संतोषी मिश्रा किसी स्टोरी के सिलसिले में उस क्षेत्र में गर्इं तो उनकी अवस्था देखकर उनका मन द्रवित हो उठा। उन्हें लगा कि उनके दर्द को एक स्टोरी में समेट पाना संभव नहीं है। तब उन्होंने उनके दर्द को बयां करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का निश्चय किया और इस तरह साकार हुई ‘मुंबई ४००००८’।
३४ मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री का प्रीमियर आगामी मामी फिल्म फेस्टिवल में होनेवाला है। इसके अलावा इसे कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया जाएगा। संतोषी बताती हैं कि इस डॉक्यूमेंट्री के लिए उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में करीब ४ महीने तक शूटिंग की। कोरोना की दूसरी लहर में इसे शूट करना एक विषम चुनौती थी। आने-जाने का साधन तक नहीं था। ऐसे में कई बार उन्हें पुलिसवालों की मदद लेनी पड़ी। वहां कई ऐसी औरतें थीं, जो काफी दिनों से भूखी थीं क्योंकि उनका व्यवसाय ही स्पर्श का है और सोशल डिस्टेंसिंग के दौर में जहां ६ फीट की दूरी रखनी थी वहां भला कौन उनके पास आता। अब जबकि शहर सामान्य होने लगा है तब भी लोग वहां जाने से डरते हैं। ऐसे में दो वक्त की रोटी जुटाना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया है। संतोषी बताती हैं कि इस क्षेत्र में कई स्वयंसेवी संस्थाएं काम कर रही हैं, परंतु वो नाकाफी है। इसके लिए सोच बदलने के साथ ही कुछ बड़े उपाय करने होंगे, ताकि समाज में अछूत समझे जानेवाले इस समुदाय को भी दो वक्त की रोटी नसीब हो सके। चूंकि संतोषी खुद क्राइम व लीगल रिपोर्टर रही हैं इसलिए वे एक खास रहस्य खोलते हुए बताती हैं कि आईपीसी के नजरिए से देश में प्रॉस्टिट्यूशन को लीगल स्टेटस हासिल है, पर यहां इस व्यवसाय को संगठित रूप में चलाना अपराध है। इसलिए इन सेक्स वर्कर्स की समस्या काफी बढ़ जाती है।