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गहरा सकता है बिजली का संकट

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नई दिल्ली, केंद्र सरकार और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह भले ही दावा कर रहे हों कि कोयला संकट के चलते देश में बिजली गुल होने की आशंका पूरी तरह गलत है, पर हकीकत में हालात उनके दावों के अनुकूल तो बिल्कुल नहीं हैं। दिल्ली के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो बिजली संकट पर दिल्ली में मैराथन हाईलेवल मीटिंग्स की आवश्यकता नहीं पड़ती। कल भी नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में कोयले की कमी और बिजली संकट पर गहन चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री, कोयला मंत्री, ऊर्जा सचिव समेत एनटीपीसी के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में बिजली उत्पादन और कोयला माइनिंग की रिपोर्ट पेश की गई। लिहाजा, यह तय है कि देश में कोयले की स्थिति केंद्र सरकार के दावों से उलट है, जिससे आनेवाले वक्त में बिजली का गहन संकट गहरा सकता है।
रविवार को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने दावा किया था कि देश में फिलहाल बिजली संकट नहीं है और अगले कुछ दिनों में भी ऐसा नहीं होगा। हमारे पास कोयले का विशाल भंडार है, कोयला संकट के बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। बिजली को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।
राष्ट्रीय बिजली पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार करीब १६ गीगावाट क्षमता के कोयला आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र कोयले की किल्लत के कारण ठप पड़े हैं। किंतु केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि देश में पर्याप्त कोयला उपलब्ध है और बिजली संयंत्रों की मांग पूरी करने में सक्षम है। कोयला मंत्रालय का कहना है, ‘बिजली संयंत्रों के पास करीब ७२ लाख टन कोयले का भंडार है, जो ४ दिन की जरूरतों के लिए पर्याप्त है और कोल इंडिया के पास ४ करोड़ टन कोयला है, जो बिजली संयंत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। सच तो यह है कि इस साल आयातित कोयले की जगह घरेलू कोयले की आपूर्ति की गई है।’ ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार अगस्त से ही कम है। इस समय १६.८ गीगावाट बिजली क्षमता वाले संयंत्रों के पास एक दिन के लिए भी कोयला नहीं बचा है और २९ गीगावाट क्षमता वाले संयंत्रों के पास तीन दिन से भी कम का कोयला बचा है।