मुंबई, दिवाली पर नए कपड़े, आभूषण, वाहन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक चीजों सहित अन्य वस्तुओं की खरीददारी काफी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में लोग खरीददारी के लिए शुभ मुहूर्त के साथ-साथ अच्छे ऑफर का भी इंतजार करते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते ट्रेंड के कारण ऑफर और खासकर लकी ड्रॉ का क्रेज भी लोगों में काफी बढ़ा है। लोगों में बढ़ते इस नए ट्रेंड का लाभ साइबर के सेंधमार अपनी दिवाली चमकाने के लिए कर रहे हैं। लकी ड्रॉ का झांसा देकर साइबर के ठग लोगों के बैंक खाते में सेंधमारी कर रहे हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने लोगों से लकी ड्रॉ से सावधान रहने का आह्वान किया है।
बता दें कि दिवाली के मौके पर हैकर्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी करनेवाले स्वैâमर्स लोगों से ठगी करने के लिए नई-नई तरकीबों के साथ सक्रिय हो गए हैं। साइबर अपराधी लोगों को मोबाइल पर, फेसबुक, व्हॉट्सऐप व दूसरी सोशल नेटवर्विंâग साइटों के जरिए दिवाली गिफ्ट, गिफ्ट वाउचर, शॉपिंग ऑन बिग डिस्काउंट या लॉटरी, लकी ड्रॉ का मैसेज भेजकर अकाउंट खाली करने में जुटे है। ऐसे में मुंबई पुलिस ने नागरिको से इस तरह के ऑफरों से बचने का आह्वान किया है।
मुंबई पुलिस की साइबर सेल के अनुसार ठग फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स के जरिए मोबाइल, लैपटॉप्स, टीवी और दूसरे प्रोडक्ट्स को काफी डिस्काउंट के साथ बेचने का दावा कर रहे हैं। इनके झांसे में आकर नागरिक ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं और उनके पैसे साइबर क्रिमिनल तक पहुंच जाते हैं। इन फर्जी साइट्स को कई तरीकों से प्रमोट किया जाता है। इस वजह से कई लोग इनके लालच में फंसकर पैसे गवां देते हैं। इसके लिए इस तरह के ऑफरवाले लिंक से बचने का आह्वान साइबर सेल के तरफ से किया गया है
महाराष्ट्र साइबर सेल की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष २०१९ से २०२१ सितंबर यानी पिछले तीन वर्षों में साइबर क्राइम से जुड़े करीब १५ हजार २१० ऑनलाइन प्रâॉड और धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। लोग त्योहार के दिनों साइबर अपराधी सस्ते सामान का लालच देकर ऑनलाइन प्रâॉड, धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं।
मुंबई पुलिस के साइबर सेल ने लोगों से दिवाली से पहले ‘लकी ड्रॉ’ की आड़ में धोखाधड़ी के जाल में नहीं फंसने की अपील की है। स्वैâमर्स ‘ऑनलाइन शॉपिंग लकी ड्रॉ कॉन्टेस्ट’ जैसे शीर्षकों के साथ-साथ ‘स्व्रैâच कार्ड’ और प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स फर्मों के नाम से पत्र के साथ अलग-अलग पेशकश कर रहे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि उन्होंने एक लाख रुपए से लेकर १० लाख रुपए तक के पुरस्कार जीते हैं। फिर लोगों से पुरस्कार का दावा करने के लिए एक राशि जमा करने के लिए कहते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों को धोखा देना है। किसी को भी इस तरह की प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लेना चाहिए और इसकी बजाय पुलिस को सूचना देनी चाहिए।





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