मुंबई, अपने किसी भी परिजन की मौत की कल्पना से लोग डर जाते हैं। खासकर महिलाएं अपने जीते जी पति या बच्चों की मौत के बारे में सोचना भी पसंद नहीं करती हैं। लेकिन एक शख्स की संभावित कानूनी मौत से दो महिलाओं को यह दर्द सहना होगा। उक्त शख्स पर तीन बेटियों की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत के इस पैâसले से कथित दो महिलाओं पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इनमें एक दोषी करार दिए गए हत्यारे की मां है तो दूसरी पत्नी। मां को जीते-जी अपने बेटे की मौत देखनी पड़ेगी। तो वहीं दूसरी महिला अपना पति गंवाएगी। हालांकि इस सजा से पत्नी संतुष्ट भी है क्योंकि उसने अपनी तीन बेटियों को गंवाने का दर्द भी सहा है और पति ही उन तीन बेटियों का हत्यारा है।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में अपर जज एवं जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक तिहरे हत्याकांड का मामला विचाराधीन था। अंतिम सुनवाई के बाद बीते शुक्रवार को न्यायाधीश ने हत्यारोपी को जैसे ही दोषी करार देते हुए मौत सजा सुनाई। दोषी की मां की आंखों के सामने अंधेरा छा गया तो वहीं हत्यारोपी की पत्नी की आंखें खुशी और गम के मिश्रित आंसुओं से छलछला उठी। पत्नी की आंखों के सामने तीन साल पुराना वह खौफनाक मंजर एक बार फिर किसी चलचित्र की तरह घूम गया।
यह घटना १३ नवंबर २०१८ को बानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत वीर गांव की थी। वीर ग्राम निवासी छिदामी उर्फ छिद्दू अव्वल दर्जे का शराबी था। उसकी पत्नी किसी तरह खेती-बाड़ी करके अपना और पांच बच्चियों, पति और बूढ़ी सास का गुजारा चला रही थी। उस पर छिद्दू शराब पीकर राजवती से मारपीट करता था। छिद्दू, बेटियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं करता था। राजवती को छिद्दू बेटे न होने का ताना मारता था। उसकी शराब की लत और तानों से राजवती तंग आ गई थी। उस साल पूरा देश जब सबसे बड़े त्योहार दीपावली की तैयारियों में जुटा था तभी छिद्दू की मारपीट से तंग होकर राजवती दो छोटी बच्चियों के साथ घर छोड़कर मायके चली गई।
राजवती के रूठकर घर से जाने पर छिद्दू बौखला गया। उसने पहले राजवती को वापस लौटने के लिए संदेश भेजा लेकिन जब राजवती ने उसे कोई जवाब नहीं दिया तो वह बौखला गया। उसने पहले अपनी तीनों मासूम बेटियों के सिर पर सोते समय हथौड़े से प्रहार किया और जब वो मासूम दर्द से कराह रही थीं तभी पेट्रोल डालकर उन्हें जलाने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं उसने इसके बाद रसोई गैस से पूरे घर को जलाने की कोशिश की थी। छिद्दू के इस नृशंस कृत्य से उसकी ११ वर्षीया बेटीr अंजलि, ७ वर्षीया राधिका और ३ वर्षीया विशाखा की मौके पर ही मौत हो गई थी। दीपावली के मौके पर पिता द्वारा जलाई गई तीन बेटियों के जिस्म की होली से पूरा देश दहल उठा था।





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