मुंबई, ६ दिन पहले पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के तार देशभर से जुड़े हैं। पूरे खेल का मास्टरमाइंड मुंबई का बॉथम रोड्रिक्स है। बेरोजगार युवकों को लालच देकर वह काम पर रखता और उनसे ठगी करवाता था। इस गिरोह ने १५ लाख से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाने का टारगेट रखा था। गिरफ्तार सभी आरोपी मुंबई के सांताक्रुज और नालसोपारा के रहनेवाले हैं। जबकि इस ठगी का मास्टरमाइंड जो कालीना सांताक्रुज का रहनेवाला है वह अभी तक फरार है।
गिरोह के सदस्य बी. कॉम. तक पढ़े-लिखे हैं। मुंबई के रहनेवाले आरोपी आपस में सभी दोस्त हैं। दो लड़के-लड़कियां गर्लप्रâेंड-बॉयप्रâेंड भी हैं। गिरोह के एक नाबालिग सहित ९ लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस मुख्य आरोपी की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है। डूंगरपुर की डीएसटी टीम ने १८ नवंबर को सागवाड़ा में किराए के मकान में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया था। गैंग के सरगना बॉथम ने कॉल सेंटर पर काम करने लिए लड़के-लड़कियों को १० से २० हजार की सैलरी पर रखा था। उसने एक किराए के मकान में फर्जी कॉल सेंटर पर काम शुरू किया।
सीआई सुरेंद्र सोलंकी के मुताबिक मास्टरमाइंड ने एक कमरे में कॉल सेंटर का पूरा सेटअप लगा रखा था। एंड्रॉयड मोबाइल फोन, लैपटॉप, कप्पा की इंटरनेट लाइन और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगा रखे थे। इंटरनेट कॉलिंग करके अमेरिका के लोगों से बात करते। मास्टरमाइंड बॉथम के साथ ही पकड़े गए गिरोह के सदस्यों में ६ लड़के-लड़कियां मुंबई के रहनेवाले हैं। पुलिस ने केरिना किनी (१९), जारा (१९), कुणाल (२४), लक्ष्मण सिंह नेगी (२५), कल्पेश नायक (२८), रूथ फेलीक्स डिमेलो (१९), रितेश सुनकारे (२१) निवासी मुंबई और सागवाड़ा के रहनेवाले रोशन कलाल (२४) को गिरफ्तार किया है।





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