मुंबई। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की मुश्किल बढ़ गई है। बीएमसी ने अपनी जांच में पाया है कि राणे के जुहू स्थित अधीश बंगले में बिना अनुमति के अवैध परिवर्तन किया गया है। इसके साथ ही बंगले में अवैध निर्माण के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है। हालांकि बीएमसी ने बंगले में अवैध निर्माण हटाने के लिए राणे को सात दिनों की मोहलत दी है। यदि इस दौरान बीएमसी को संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अवैध परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बीएमसी ने सेक्शन 351 (1) के तहत जारी नोटिस में उन स्थानों को चिन्हित कर बताया गया है कि बंगले में कहां- कहां अवैध रूप से परिवर्तन किया गया है। जिसमें बेसमेंट से गार्डन तक शामिल है। जिसे रेसिडेंस के रूप में परिवर्तन किया गया है। बिल्डिंग के पहली मंजिल से तीसरी मंजिल तक गार्डन की जगह को कमरे में तब्दील कर इस्तेमाल किया जा रहा है। बीएमसी ने यह नोटिस 4 मार्च 2022 को जारी की है। बीएमसी के मुताबिक बंगले में बेसमेंट को रेसिडेंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है जो नियमों का खुला उल्लंघन है। इसी तरह पहली मंजिल से लेकर तीसरी मंजिल तक गार्डन की जगह को कमरे के रूप में तब्दील कर इस्तेमाल किया जा रहा है। चौथी मंजिल पर टेरेस के पार्ट को भी रूम बना दिया गया है। नोटिस में राणे से बीएमसी ने पूछा है कि आप ने बिना परमिशन कैसे बंगले में परिवर्तन किया। साथ ही चेतावनी देते हुए बीएमसी ने कहा है कि सात दिनों के भीतर यदि आप संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे तो अवैध परिवर्तन हटाने के लिए बीएमसी कार्रवाई कर सकती है। साथ ही धारा 425 ए के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। बता दें कि बीएमसी को अधीश बंगले में अवैध निर्माण की शिकायत मिली थी। जिसके बाद नोटिस जारी की गई और 21 फरवरी को बीएमसी की टीम ने बंगले में जाकर जांच की थी।





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