मुंबई: नासिक को देश का वाइन कैपिटल कहा जाता है। यहां से अंगूर और वाइन देश-विदेश में सप्लाई किए जाते हैं। इस लोकसभा सीट से महायुति के उम्मीदवार और दो बार के शिवसेना सांसद हेमंत गोडसे हैट्रिक लगाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। लेकिन, उनकी राह में महा विकास आघाडी और शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार राजाभाऊ (पराग) वाजे रोड़ा बनते दिखाई दे रहे हैं। वाजे राज्य में मराठा आंदोलन, सरकार से प्याज किसानों की नाराज़गी और महायुति के नेताओं में आपस में समन्वय की कमी का पूरा फायदा उठाने की कोशिश में हैं। वहीं, गोडसे की जीत पक्की करने के लिए स्थानीय नेताओं में आपसी मतभेद को दूर करने का मामला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री अजित पवार तक पहुंचा है। स्थानीय नेताओं के मुताबिक, दोनों पार्टी के नेताओं की तरफ से मामले को सुलझाने की कोशिश हुई है। लेकिन इस कोशिश का असर फिलहाल जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। इसके चलते गोडसे और वाजे के बीच कड़ी टक्कर है। इन दोनों उम्मीदवारों को पटखनी देने के लिए वंचित विकास आघाडी से करण गायकर और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में शांतिगिरि मौनगिरि महाराज चुनाव मैदान में हैं।
जनता के बीच वाजे की अच्छी साख
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वाजे 2014 में सिन्नर से शिवसेना के विधायक रह चुके हैं। उनके दादा शंकर वाजे सिन्नर विधानसभा के पहले विधायक बने थे। उनकी दादी रुक्मिणी बाई वाजे सिन्नर से पहली महिला विधायक बनी थीं। वाजे परिवार की जनता के बीच अच्छी पैठ है। वाजे की कार्यशैली से जनता प्रभावित है। इस बार शिवसेना यूबीटी ने वाजे को अपना प्रत्याशी बनाया है। वे धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। एनसीपी और शिवसेना में पड़ी फूट और मराठा आंदोलन को लेकर मतदाताओं की नाराज़गी का फायदा वाजे को हो सकता है। नासिक में प्याज किसानों का भी मामला गर्म है।
सीएम के अनुरोध के बाद भी नहीं लिया पर्चा वापस
शांतिगिरि महाराज ने पहले शिंदे शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल किया था। लेकिन, गोडसे के नाम के ऐलान के बाद वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिंदे ने शांतिगिरि महाराज से पर्चा वापस लेने का भी अनुरोध किया है। लेकिन नाम वापसी का दिन बीत गया है और वह अब चुनाव मैदान में हैं। शांतिगिरि महाराज के अलावा सिद्धेश्वरानंद सरस्वती भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, शांतिगिरि महाराज के बड़ी संख्या में अनुयायी नासिक लोकसभा सीट में रहते हैं। इससे शिवसेना प्रत्याशी गोडसे को चुनाव में नुकसान हो सकता है।





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