मुंबई: महाराष्ट्र चुनाव में सोमवार अहम दिन है. इस दिन नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में बड़ी संख्या में बागी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. अगर वे नामांकन वापस नहीं लेते हैं तो दोनों गठबंधनों का खेल बिगड़ सकता है. ऐसे में मुंबई की 36 विधानसभा सीटें भी काफी अहम हो जाती हैं. यहां मनसे ने कम से कम 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
राज ठाकरे की मनसे का महायुती के साथ सीटों का बंटवारा नहीं हो सका इस कारण उन्होंने बड़ी संख्या में अपने उम्मीदवार उतार दिए. महायुती में मुंबई में भाजपा 17 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इनमें से कम से कम 22 सीटों पर मनसे ने उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें से भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ 12 और शिवसेना के खिलाफ 10 उम्मीदवार हैं. मजेदार बात यह है कि चंद महीने पहले संपन्न लोकसभा चुनाव में मनसे ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारे थे. उसने खुले तौर एनडीए और पीएम नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की बात कही थी.
वोट काटने का काम करेगी मनसे?
ऐसे में अब संभावना जताई जा रही है कि क्या मनसे मुंबई की सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन के वोट काटने का काम करेगी. मुंबई की सेवरी सीट हैं जहां महायुती ने अपना उम्मीदवार नहीं दिया है. यहां से मनसे के उम्मीदवार मैदान में हैं. इस तरह से महायुती ने मुंबई में मनसे को एक सीट दी है लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं है.
ऐसे में कई सीटों पर तकरार बढ़ गया है. मुंबई की माहिम और वर्ली सीट पर तकरार गहरा गया है. माहिम से मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे खुद मैदान में हैं. उनके सामने शिवसेना के सदा सर्वांकर हैं. इस कारण यहां लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है. इसी तरह वर्ली में मनसे उम्मीदवार संदीप देशपांडे शिवसेना उद्धव गुट के आदित्य ठाकरे और शिवसेना शिंदे गुट के मिलिंद देवड़ा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
वैसे तो मनसे ने नगर की अधिकतर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं लेकिन भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिए हैं. इसमें कोलाबा से विधानसभा अध्यत्र राहुल नारवेकर, बांद्रा वेस्ट से मुंबई भाजपा के प्रमुख आशिष शेलार, मुलुंद से मिहिर कोटेचा के नाम शामिल हैं.
ऐसे अब देखना है कि सोमवार को मनसे के उम्मीदवार नाम वापस लेते हैं या नहीं. अगर वे नाम वापस नहीं लेते हैं तो कहीं न कहीं वे भाजपा-शिवसेना गठबंधन को नुकसान पहुंचाएंगे. मुंबई की कुछ सीटों पर मनसे की अच्छी पकड़ हैं. ऐसे में पूरी तरह से दोतरफा चुनाव में मनसे महायुती का खेल बिगाड़ सकती है.




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