मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के पहले महा विकास अघाड़ी अपने घोषणापत्र में कई किफायती योजनाओं का वादा कर सकता है। इनमें महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना भी शामिल हो सकती है। कांग्रेस ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने अनुभव का उपयोग कर महिलाओं को 1500 या 2000 रुपये देने का वादा करने पर चर्चा की है। एमवीए का घोषणापत्र 6 नवंबर को जारी होगा। एमवीए को पता चला है कि ‘लाडली बहन’ योजना की वजह से सत्ताधारी गठबंधन कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। इससे पहले कांग्रेस और एमवीए के अन्य दलों के नेताओं के बीच आंतरिक बहस हुई थी कि उन्हें बहुत ज़्यादा वादे नहीं करने चाहिए। लेकिन अब उन्हें रिपोर्ट मिली है कि ‘लाडकी बहन’ योजना की लोकप्रियता के कारण सत्ताधारी पार्टियों को विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में फायदा हो सकता है।
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि सिर्फ वही मुफ्त योजनाएं घोषित करनी चाहिए जो आर्थिक रूप से लागू की जा सकें। इसके बावजूद, इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एमवीए कई कल्याणकारी योजनाओं का वादा करने जा रही है। हो सकता है कि ये वादे महायुति सरकार के वादों से भी बड़े हों। एमवीए का घोषणापत्र 6 नवंबर को जारी होने की उम्मीद है।
एमवीए के मेनिफेस्टों में हो सकते हैं ये वादे
एक एमवीए नेता ने कहा है कि पहले इस बात पर बहस हो रही थी कि हमें भी इसी तरह का वादा करना चाहिए या नहीं, लेकिन अब फैसला हो गया है कि हम भी ऐसी ही योजना देंगे। सवाल यह है कि 1,500 प्रति माह दें या 2,000। इस पर एक-दो दिन में फैसला हो जाएगा। कांग्रेस कर्नाटक और तेलंगाना में अपना विजयी फॉर्मूला दोहरा सकती है। पार्टी किसानों का कर्ज माफ करने और 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का वादा कर सकती है। कर्नाटक में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा है। जब राज्य सरकार इस योजना को वापस लेने की बात कर रही थी, तो खड़गे ने इसका विरोध किया था। महाराष्ट्र में पहले से ही एक योजना है जिसमें महिलाएं राज्य परिवहन की बसों में आधा किराया देती हैं।
लाडकी बहन योजना का लेकर क्यों था संदेह बता दें कि पहले खड़गे के अलावा, एमवीए के दूसरे नेताओं ने भी लाडकी बहन योजना पर संदेह जताया था। वहीं एनसपी एसपी प्रमुख शरद पवार ने हमारे सहयोगी अखबार ईटी को दिए एक इंटरव्यू में योजना का विरोध नहीं किया, लेकिन इस पर संदेह जताते हुए कहा कि यह योजना चुनाव तक ही चल सकती है, क्योंकि सरकार ने इसे चलाने के लिए दूसरे मदों से पैसे लिए हैं।





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