मुंबई : पहले पति से कानूनी तरीके से अलग हुए बगैर तीसरी शादी करने वाली महिला के विवाह को अमान्य घोषित करने के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कायम रखा है। मुंबई की फैमिली कोर्ट ने महिला के विवाह को अमान्य घोषित किया था। फैमिली कोर्ट ने महिला के तीसरे पति की तलाक की अर्जी पर यह फैसला सुनाया था, जिसे पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
जानकारी के अनुसार, आपसी अनबन के चलते पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक के आवेदन में किया था। आवेदन में पति ने दावा किया था कि महिला ने जब मई 2015 में उससे विवाह किया था, तो वह पहले से शादीशुदा थी। उसने दो विवाह किए थे, जो कानूनी तरीके से रद्द नहीं हुए थे। महिला ने यह बात उससे छुपाई थी। फैमिली कोर्ट ने केस के तथ्यों के मद्देनजर एकतरफा फैसला सुनाते हुए महिला की शादी को भंग किया था। फरवरी 2019 के फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ महिला ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
‘महिला को गुजारा-भत्ता के लिए अपील की छूट’
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच के सामने महिला की अपील पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने कहा, उसकी मुवक्किल ने पहले दो विवाह किए थे। दोनों विवाह कानूनी तरीके से रद्द नहीं किए गए थे। महिला के वकील ने कहा कि शादी को अमान्य घोषित करने से पहले उसे स्थायी गुजारा भत्ता नहीं दिया। इसलिए फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया जाए। इन दलीलों पर बेंच ने कहा कि महिला पहले से शादीशुदा थी।
इस पर कोई विवाद नहीं है। इस लिहाज से फैमिली कोर्ट द्वारा महिला के विवाह को अमान्य घोषित करने के निष्कर्ष में कोई दोष नजर नहीं आता। फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत महिला के विवाह को अमान्य घोषित किया था। इसे कायम रखते हुए बेंच ने महिला को अधिनियम की धारा 25 के तहत मेंटेनेंस के लिए चार हफ्ते के लिए फैमिली कोर्ट के पास आवेदन करने की छूट दी है। बेंच ने फैमिली कोर्ट को मेरिट के आधार पर भरण पोषण के आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।





Users Today : 26
Users Yesterday : 18
Users Last 7 days : 369
Users Last 30 days : 858
Users This Month : 316
Users This Year : 9266
Total Users : 70473
Views Today : 34
Views Yesterday : 29
Views Last 7 days : 510
Views Last 30 days : 1114
Views This Month : 437
Views This Year : 10474
Total views : 106497
Who's Online : 0


