मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (डीएमसीएसएल) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 188.41 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच से पता चला कि सुरेश कुटे के नेतृत्व में डीएमसीएसएल प्रबंधन ने कथित तौर पर 4 लाख से अधिक निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की और निजी लाभ के लिए धन को कुटे समूह की संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया।
ईडी की मुंबई जोनल कार्यालय ने 9 मई, 2025 को मेसर्स ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड यानी डीएमसीएसएल के सुरेश कुटे और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत 188.41 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ईडी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित कुटे समूह की कंपनियों की विभिन्न संस्थाओं की भूमि, भवन, संयंत्र और मशीनरी शामिल हैं।
एफआईआर के आधार पर जांच
ईडी ने मई से जुलाई 2024 के दौरान महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं और एमपीआईडी अधिनियम, 1997 की धारा के तहत मेसर्स ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (डीएमसीएसएल) के माध्यम से सुरेश कुटे और अन्य द्वारा निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।
4 लाख से अधिक निवेशकों से धोखाधड़ी
“डीएमसीएसएल का प्रबंधन और नियंत्रण सुरेश ज्ञानोबाराव कुटे, यशवंत वी. कुलकर्णी और अन्य के पास था। इसने विभिन्न जमा योजनाएं शुरू कीं और ब्याज देने का दावा किया, जो 12 प्रतिशत से 14 प्रतिशत तक था। पीएमएलए जांच के दौरान, यह पाया गया कि सुरेश कुटे और अन्य ने 4 लाख से अधिक भोले-भाले निवेशकों को उच्च रिटर्न का वादा करके डीएमसीएसएल के साथ पैसा जमा करने के लिए लुभाया।





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