मुंबई, जेल में कैदियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की घटनाएं अब आम हो गई हैं। हर बार जेल प्रशासन और जेल अधिकारियों को कैदियों की मौत या खुदकुशी का जिम्मेदार ठहराया जाता है। कई बार तो मृतक कैदी के परिजन जेलकर्मियों पर सीधे हत्या का ही आरोप लगा देते हैं। लेकिन इस बार इंदौर जेल से एक कैदी की असली खुदकुशी का मामला सामने आया है। इस वैâदी पर दो लोगों की हत्या का आरोप था और उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा था।
बीते शनिवार को इंदौर स्थित सेंट्रल जेल के कारखाना विभाग में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहां कारपेंटर का काम करनेवाले कैदी ने अचानक लकड़ी काटनेवाले इलेक्ट्रिक कटर से अपना गला काट लिया। उस कैदी के इस आत्मघाती कदम से वहां मौजूद दूसरे कैदी सकते में आ गए। वे जब तक कुछ समझ पाते और उसे रोकने का प्रयास करते, उसकी गर्दन कट गई थी।
कहते हैं गरीब की जोरू पूरे गांव की भौजाई होती है। इंदौर जेल में खुदकुशी करनेवाले वैâदी अनिल यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। अनिल नरसिंहपुर जिले के आजाद नगर इलाके का रहनेवाला था। वह कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि एक सीधा-सादा आदमी था। उसकी इसी सादगी के कारण कुछ लोग हमेशा उसका मजाक उड़ाया करते थे। उपहास करनेवाले कुछ लोग तो उसे अपमानित करने का कोई मौका नहीं चूकते थे। इससे अनिल आजिज आ चुका था और एक दिन अनिल के सब्र का बांध टूट गया। उसके मन में नफरत और बदले की आग धधकने लगी और उसी आक्रोश में उसने दो लोगों का कत्ल कर दिया। उसने प्रताड़ना की हद पार करनेवाले दो लोगों को दर्दनाक ढंग से मौत के घाट उतार दिया था।
आमतौर पर बदला लेनेवाला बदला पूरा होने पर खुश होता है। लेकिन अनिल के साथ ऐसा नहीं हुआ। गुस्सा शांत होने पर उसका मन पश्चाताप से भर गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। हालांकि, वर्ष २०१८ में हुए डबल मर्डर के मामले में अदालत ने उसे उम्रवैâद की सजा दी थी लेकिन शायद खुद अनिल की नजर में वो सजा कम थी। इसलिए उसने अपने लिए भी वैसा ही दर्दनाक मौत का विकल्प चुना। उसने जिस तरह इलेक्ट्रिक कटर मशीन से दो लोगों का गला काटा था, उसी तरह अपना भी गला काटकर तड़पते हुए खुदकुशी की।
वर्ष २०१९ में अदालत द्वारा उम्रवैâद की सजा दिए जाने के बाद अनिल को नरसिंहपुर की जेल से इंदौर के केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन अनिल द्वारा दो लोगों की हत्या किए जाने की सजा उसका पूरा परिवार भुगत रहा था। अनिल के जेल जाने के बाद उसका परिवार आर्थिक परेशानी तो झेल ही रहा था, साथ ही उन्हें सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ रहा था। इसका एहसास उसे तब होता था, जब पत्नी उसे जेल में मिलने आती थी। उसका मायूस चेहरा देखकर अनिल का पश्चाताप और बढ़ जाता था। १६ अगस्त को उसकी पत्नी उससे मिलने आई थी, तबसे वो गुमसुुम रहने लगा और जेल की पैâक्ट्री में काम करने भी नहीं गया। लेकिन शनिवार की सुबह वह पैâक्ट्री पहुंचा। पहले उसने वहां एक प्लाईवुड का नाप लिया और लकड़ी काटने की मशीन चलाने गया। लोगों को लगा कि अनिल कुछ बनाने के लिए प्लाईवुड काटने जा रहा है लेकिन अचानक अनिल ने लकड़ी काटने की मशीन चलाकर अपना गला रेत लिया। फिलहाल, मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।





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