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सरकारी नौकरियों में आरक्षण को उच्च न्यायालय में चुनौती

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मुंबई : विशेष पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए महाराष्ट्र लोक सेवा में 1994 में प्रदान किए गए दो प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देते हुए बंबई उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। मराठा आरक्षण को चुनौती दे चुके संगठन ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी की इस याचिका में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र सरकार की नौकरियों में एसबीसी के लिए दो प्रतिशत कोटा असंवैधानिक है। याचिका को सोमवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन समय की कमी के कारण इस पर विचार नहीं किया जा सका।
अधिवक्ता संजीत शुक्ला के माध्यम से दायर याचिका में राज्य सरकार के 1994 के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें एसबीसी की श्रेणी बनाई गई थी और सरकारी नौकरियों में उनके लिए दो आरक्षण का प्रावधान किया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि उक्त प्रावधान विभिन्न विशेष या अनुसूचित श्रेणियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का कुल प्रतिशत 52 प्रतिशत तक ले जाता है, जो उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सीमा का उल्लंघन है।