मुंबई, 28 जनवरी: महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस एक बार फिर से गलत वजह से सुर्खियों में है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर, पूर्व गृहमंत्री और कुख्यात पूर्व एएसआई सचिन वाजे की कारगुजारियों की वजह से यह महकमा पहले से ही गलत वजह से चर्चाओं में रहा है। अब महाराष्ट्र के डीजीपी आलोक पांडे और मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले 187 पुलिस अफसरों के ट्रांसफर के मुद्दे पर इस तरह से भिड़ गए हैं कि मामला महाराष्ट्र एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल तक पहुंच गया है और उसने दोनों के बीच तालमेल का सख्त अभाव पाया है।
महाराष्ट्र एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एमएटी) में महाराष्ट्र डीजीपी संजय पांडे के हाथों हुए 187 पुलिस अधिकारियों के तबादले के मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ है कि डीजीपी और मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले में नहीं पट रही है। डीजीपी पांडे ने बिना पुलिस कमिश्नर को भरोसे में लिए मुंबई पुलिस के 187 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया, जिनमें से कई को मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कार्य मुक्त नहीं किया है। इसी के बाद कार्य मुक्त नहीं किए गए कुछ पुलिस अफसरों ने एमएटी के सामने तबादले के आदेश के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। नागराले ने भी पांडे की ओर से किए गए तबादले के आदेश पर आपत्ति जताई और पिछले साल दिसंबर में उद्धव सरकार से भी उनके खिलाफ शिकायत कर चुके हैं।
इस मामले में 20 जनवरी को वीजे जाधव बनाम महाराष्ट्र सरकार के मुकदमे की सुनवाई के दौरान एमएटी ने पाया कि डीजीपी और पुलिस कमिश्नर के बीच नहीं बन रही है और पाया कि इसके लिए वह उचित फोरम नहीं है। हालांकि, 24 जनवरी की सुनवाई के दौरान एमएटी बेंच ने डीजीपी पांडे से कहा है कि वह एक हलफनामा दायर करके बताएं कि उन्होंने मुंबई पुलिस के अफसरों के तबादले का आदेश क्यों दिया और पुलिस कमिश्नर नागराले से परामर्श क्यों नहीं किया गया। डीजीपी और पांडे दोनों ही डायरेक्टर जनरल रैंक के पुलिस अधिकारी हैं और दोनों ही सीधे राज्य के गृह विभाग को रिपोर्ट करते हैं।





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