मुंबई, र्इंधन की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति बनाई है। केंद्र सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रही है लेकिन ईवी वाहनों के मामले में राज्य सरकार की चाल सुस्त नजर आ रही है। मुंबई की सड़कों पर बड़े पैमाने पर निजी इलेक्ट्रिक वाहन दिखाई दे रहे हैं लेकिन राज्य सरकार के बेड़े में अभी भी सिर्फ सात ही इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं।
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति २०२१ नीति बनाई है, जिसे राज्य पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने भी शासनादेश जारी कर उसके कार्यान्वयन की मंजूरी दे दी है। यह नीति ३१ मार्च २०२५ तक लागू रहेगी। इसमें बैटरी से चलनेवाले दुपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन राशि देने का पैâसला लिया गया है। इसे महंगे र्इंधनों का विकल्प और वायु प्रदूषण को कम करके पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए डिजाइन किया गया है। बैटरी चालित वाहनों के लिए योजना और चार्जिंग स्टेशनों की संख्या भी निर्धारित की गई है। राज्य में एक जनवरी २०२२ से सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी, निकाय संस्थाओं और सरकारी फंड से खरीदे गए वाहन बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन होंगे। सरकारी उपयोग के लिए किराए पर लिए जानेवाले वाहन भी ईवी होंगे। यह निर्णय लिया गया है। हालांकि कोई प्रतिसाद न मिलने से इसकी समय सीमा एक अप्रैल तक बढ़ा दी गई थी।
सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों की संख्या निर्धारित की गई है। हर तीन किमी पर कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन होना चाहिए। मुंबई शहर और आस-पास के क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या- १,५००, पुणे शहर- ५००, अमरावती-३०, सोलापुर-२०, नागपुर सिटी-१५०, संभाजीनगर शहर -७५ और नासिक शहर में १०० चार्जिंग स्टेशनों की संख्या निर्धारित की गई है।





Users Today : 1
Users Yesterday : 57
Users Last 7 days : 387
Users Last 30 days : 864
Users This Month : 348
Users This Year : 9298
Total Users : 70505
Views Today : 1
Views Yesterday : 81
Views Last 7 days : 540
Views Last 30 days : 1126
Views This Month : 485
Views This Year : 10522
Total views : 106545
Who's Online : 0


