मुंबई, सरकार की गलत नीतियों के कारण एक के बाद एक कई कंपनियों के राज्य से बाहर जाने के कारण लाखों बेरोजगारों के हाथों से रोजगार का अवसर निकल गया है। इन सबके बीच अब यह सरकार शिक्षा के मंदिर को भी बेचने निकल पड़ी है, जिसके तहत ‘स्कूल दत्तक योजना’ को बीते महीने मंजूरी दे दी गई है। योजना के शुरू होने से सरकारी स्कूल निजी हाथों में चले जाएंगे। हालांकि, इस पैâसले को लेकर जहां शिक्षाविद् नाराज हैं, वहीं इसे लेकर तरह-तरह की मार्मिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
इसी बीच गोंदिया के देवरी की छात्राओं ने उपखंड अधिकारियों के माध्यम से ‘घाती’ सरकार के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मार्मिक गुहार लगाई है। इसमें उन्होंने कहा है कि भले ही हमारे खाने के पैसे ले लो, लेकिन हमें हमारा स्कूल वापस दे दो।
दत्तक योजना को लेकर देवरी के छात्राओं ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि यदि राज्य सरकार को स्कूल चलाने के लिए पैसे की कमी हो रही है, तो पूरे महाराष्ट्र के छात्र सरकार को भोजन के लिए दिए जा रहे पैसे उन्हें दे देंगे। उन्होंने गुहार लगाते हुए कहा कि वे स्कूलों को निजी उद्यमियों के हाथ में न सौंपें। उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा है कि इसके बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुलती हैं और उन्होंने उद्यमियों की झोली में स्कूल डालने की योजना बना ही ली है तो पहले पूरी सरकार को ही चलाने के लिए निजी कंपनी के हाथों में सौंप दें।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सरकारी और स्थानीय निकायों के सभी माध्यमों के स्कूलों के लिए ‘दत्तक स्कूल योजना’ लागू करने की मंजूरी पहले ही दे दी गई। इसके तहत स्कूल को गोद लेनेवाले इस योजना में सीधे तौर पर कोई दान नहीं दिया जा सकता है। हालांकि, इसमें प्रावधान है कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी एक्ट के तहत स्कूलों को गोद लिया जा सकता है। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यक्ति, संगठन या
कॉर्पोरेट एजेंसियां इन सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए सीएसआर के माध्यम से स्कूलों को गोद ले सकेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि वे इसके जरिए स्कूल को भले ही बेहतर बनाने की कोशिश कर सकते हैं। यह योजना अगले कुछ वर्षों में सरकारी अराजकता का कारण बन सकती है। इसका बच्चों की शिक्षा पर गंभीर दुष्परिणाम होगा। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह निजी कंपनियों का घर भरने का घोटाला है। ‘घाती’ सरकार ने सरकारी स्कूलों को कुछ निजी कंपनियों के नियंत्रण में लाने के लिए गोद लेने की योजना लागू करने का निर्णय लिया है। एक ओर अनावश्यक कामों पर बेतहाशा खर्च किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा जैसे बुनियादी अधिकार को भी छीनने की साजिश की जा रही है।





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