रांची: झारखंड की राजनीति गरमाई हुई है। जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद चंपई सोरेन ने सीएम की कुर्सी संभाली है। बहुमत साबित कर उन्होंने संशय भी समाप्त कर दिया है। सब कुछ बाहर-बाहर ठीक दिख रहा है। पर, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अचानक जेएमएम के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार के सामने सहयोगी कांग्रेस के विधायकों ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है। विधायकों ने बखेड़ा खुद खड़ा किया है या इसके पीछे कोई अदृश्य ताकत है, यह तो वे ही जानें, लेकिन 2019 में सत्ता गंवा चुकी बीजेपी इससे उत्साहित है। बीजेपी के लिए झारखंड में खेल करने का यह सुनहरा मौका है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 10 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के ही दर्जन भर विधायक सरकार से खफा हैं। जेएमएम में शाश्वत दुखी रहने वाली सीता सोरेन, चमरा लिंडा और लोबिन हेम्ब्रम जैसे नेता भी हैं। इससे यही लगता है कि भाजपा के लिए बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने वाली नौबत तो दस्तक नहीं दे रही!
चंपई सोरेन ने जितनी आसानी से झारखंड की बागडोर संभाली, उनकी राह उतनी ही मुश्किल दिख रही है। झारखंड में बने महागठबंधन में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी शामिल हैं। जेएमएम के 29 विधायक हैं तो कांग्रेस के 17 और आरजेडी का एक। इस तरह सरकार के पास बहुमत के आंकड़े स्पष्ट दिखाई देते हैं। चंपई सोरेन के विश्वासमत के दौरान महागठबंधन के विधायकों में एकजुटता भी दिखी। जैसे ही चंपई सोरेन ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, विधायकों की नाराजगी सतह पर आ गई। कांग्रेस के 12 विधायक नाराज होकर कोप भवन में चले गए। उन्हें इस बात पर आपत्ति थी कि नए मंत्रिमंडल में कांग्रेस के पुराने चेहरों को ही क्यों रिपीट किया गया। नए लोगों को मौका क्यों नहीं दिया गया। उनकी नाराजगी का चरम तो तब दिखा, जब उन्होंने दिल्ली जाकर आलाकमान को अपना दुखड़ा सुनाने की घोषणा कर दी।
तीन दिनों से दिल्ली में डेरा डाले कांग्रेस के आठ विधायक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के इंतजार में हैं। कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं से उनकी मुलाकात हुई भी है, लेकिन वे खरगे से मिले बिना वापस नहीं आना चाहते। कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व भी उन्हें मनाने-समझाने की लगातार कोशिश कर रहा है। पर, आलाकमान की राय जाने बगैर वे मानने को तैयार नहीं हैं। चंपई सोरेन सरकार के लिए यह मुसीबत की घड़ी है। कांग्रेस विधायकों की नाराजगी के बीच चंपई सोरेन भी दिल्ली गए थे, लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद वे लौट आए। संभव है कि मुलाकात में कांग्रेस विधायकों की नाराजगी का भी सवाल उठा ही होगा। इसके बावजूद अभी तक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने विधायकों की नाराजगी पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है।





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