मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में मुंबई सहित ठाणे, कल्याण, पालघर और भिवंडी की लोकसभा चुनाव का परिणाम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुंबई की 6 और एमएमआर की 4 लोकसभा सीटों का मिजाज राज्य की सभी 48 सीटों पर असर डालता है। राजधानी मुंबई की 6 लोकसभा सीटों पर हर पार्टी कब्ज़ा जमाना चाहती है, जिसकी पार्टी मुंबई में जीतती है, माना जाता है कि उसका दिल्ली में दबदबा रहेगा। 1999 में कांग्रेस से टूट कर बनी एनसीपी के बाद राज्य में पक्ष-विपक्ष गठबंधन में ही चुनाव लड़ा जा रहा है। 2009 के आम चुनाव में मुंबई की 6 में से 5 सीटों पर चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को 2024 में 2 सीटों के भी लाले पड़े हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने मुंबई की 6 में से 5 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि एक सीट उत्तर-पूर्व मुंबई एनसीपी के पास थी।
मोदी लहर में कांग्रेस-एनसीपी मुंबई की सभी 6 सीटें बीजेपी-शिवसेना से हार गई थी। यही हाल, 2019 लोकसभा चुनाव में भी रहा, हालांकि कांग्रेस ने तब भी मुंबई की 6 में से 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में भी कांग्रेस-एनसीपी का बीजेपी-शिवसेना ने सूपड़ा साफ़ कर दिया था।
2019 के बदली राजनीति
2019 महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में याद किया जाता है। विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन टूट गया और शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी के साथ चली गई। 2022 में शिवसेना दो टुकड़े हो गई, जबकि एनसीपी 2023 में टूट गई। शिवसेना का शिंदे गुट और एनसीपी का अजित पवार गुट बीजेपी के साथ चला गया, जो महायुति का हिस्सा है। अब महाराष्ट्र में सीधा मुकाबला महायुति बनाम महा विकास आघाडी के बीच है। इसमें शरद पवार की एनसीपी, उद्धव गुट और कांग्रेस है।





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